Chapra Tele Consultancy : छपरा के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अब डिजिटल माध्यम से भी मजबूत हो रही है. छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए मरीजों को बार-बार प्रखंड या जिला मुख्यालय के अस्पतालों का चक्कर नहीं लगाना पड़ रहा है. इ-संजीवनी टेली कंसल्टेंसी के जरिए मरीज नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से वीडियो कॉल पर डॉक्टर से जुड़कर चिकित्सकीय सलाह ले रहे हैं. जुलाई में सारण जिले के 18,498 मरीजों ने इस सुविधा का लाभ उठाया.
गांव के पास ही डॉक्टर से मिल रही ऑनलाइन सलाह
ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों के लिए इ-संजीवनी टेली कंसल्टेंसी सेवा स्वास्थ्य सुविधा का एक अहम माध्यम बन रही है. मरीज अपने नजदीकी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर या स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचते हैं और वहां से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए डॉक्टर से जुड़ते हैं. डॉक्टर मरीज की समस्या सुनकर आवश्यक सलाह देते हैं.
सारण में 19 हब और 349 स्पोक संचालित
सारण जिले में इ-संजीवनी टेली कंसल्टेंसी का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है. जिले में 19 हब और 349 स्पोक संचालित किए जा रहे हैं. हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को स्पोक और पीएचसी तथा सीएचसी को हब के रूप में विकसित किया गया है.
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CHO मरीजों को डॉक्टर से कराते हैं कनेक्ट
स्पोक सेंटर पर तैनात कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर यानी CHO मरीजों की प्राथमिक जानकारी लेते हैं. इसके बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मरीज को हब पर मौजूद डॉक्टर से जोड़ा जाता है. डॉक्टर मरीज की बीमारी और लक्षणों के बारे में जानकारी लेकर आगे की चिकित्सा प्रक्रिया बताते हैं.
जुलाई में 18,498 मरीजों ने लिया लाभ
इ-संजीवनी सेवा के प्रति ग्रामीण मरीजों के बढ़ते भरोसे का अंदाजा जुलाई के आंकड़ों से लगाया जा सकता है. इस महीने सारण जिले में कुल 18,498 मरीजों ने टेली कंसल्टेंसी के जरिए चिकित्सकीय परामर्श लिया. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवा की पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है.
दिघवारा के डॉक्टर ने सबसे अधिक मरीजों को दी सलाह
जुलाई में टेली कंसल्टेंसी के जरिए सबसे अधिक मरीजों को ऑनलाइन परामर्श देने वालों में दिघवारा सीएचसी के डॉ. रौशन कुमार सबसे आगे रहे. उन्होंने अकेले 3,296 मरीजों को ऑनलाइन चिकित्सकीय सलाह दी. यह जिले में डॉक्टर की ओर से दिए गए ऑनलाइन परामर्श में सबसे अधिक संख्या रही.
अमनौर और मांझी के डॉक्टर भी रहे आगे
अमनौर सीएचसी के डॉ. शशांक शुभम ने जुलाई में 2,999 मरीजों को टेली कंसल्टेंसी के जरिए चिकित्सकीय सलाह दी. वहीं मांझी सीएचसी के डॉ. रोहित कुमार ने 1,872 मरीजों को ऑनलाइन परामर्श दिया. इन डॉक्टरों की सेवा से बड़ी संख्या में ग्रामीण मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही चिकित्सकीय मार्गदर्शन मिला.
ऐसे मिलती है डॉक्टर से ऑनलाइन सलाह
टेली मेडिसिन सेवा का लाभ लेने के लिए मरीज को अपने गांव के नजदीकी स्वास्थ्य उपकेंद्र या हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर जाना होता है. वहां एएनएम या CHO मरीज का पंजीकरण करते हैं और उसकी प्राथमिक जानकारी लेते हैं. इसके बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मरीज को संबंधित हब पर मौजूद डॉक्टर से जोड़ा जाता है.
डॉक्टर बीमारी के लक्षण जानकर देते हैं सलाह
ऑनलाइन परामर्श के दौरान डॉक्टर मरीज से बीमारी के लक्षण और अन्य जरूरी जानकारी लेते हैं. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच कराने की सलाह दे सकते हैं और उपचार के लिए दवाएं लिख सकते हैं. इस प्रक्रिया से मरीज को सामान्य स्वास्थ्य समस्या के लिए दूर स्थित अस्पताल जाने की जरूरत कम होती है.
ग्रामीण मरीजों का समय और पैसा बच रहा
टेली कंसल्टेंसी सेवा का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण मरीजों को मिल रहा है. पहले सामान्य बीमारी के इलाज के लिए भी कई लोगों को प्रखंड या जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता था. इससे आने-जाने में समय और पैसे दोनों खर्च होते थे. अब नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से डॉक्टर से संपर्क होने के कारण मरीजों को राहत मिल रही है.
विशेषज्ञ डॉक्टरों तक आसान हुई पहुंच
डिजिटल स्वास्थ्य सेवा के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुंचने का एक अतिरिक्त माध्यम मिला है. खासकर ऐसे मरीजों के लिए यह सुविधा उपयोगी है, जिन्हें सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दूर अस्पताल जाने में परेशानी होती है. इससे स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र और बड़े स्वास्थ्य संस्थानों के बीच डिजिटल संपर्क भी मजबूत हो रहा है.
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