छपरा (सारण) से संजय भारद्वाज की रिपोर्ट
Saran DPO Bribery Case : सारण के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा, योजना एवं लेखा) अजीत कुमार हरिजन के द्वारा अवैध लेनदेन के कई कारनामे किए गए हैं. उनके पास आय से करीब 10 गुणा संपत्ति मिली है. इसका खुलासा डीडीसी के नेतृत्व में गठित पांच सदस्यीय जांच टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट में किया है. जांच रिपोर्ट को सारण जिलाधिकारी को सौंप दिया गया है.
जांच के क्रम में यह तथ्य सामने आया है कि सारण जिले में 32 महीने के अंदर ₹27.5 लाख वेतन की जगह डीपीओ और उनकी पत्नी के खाते में ढाई करोड़ से अधिक की राशि आई है. इसी दरमियान डीपीओ के द्वारा सारण जिले के एकमा प्रखंड में लगभग ₹42 लाख की लागत से 120 कट्ठा जमीन खरीदी गई है और लाखों की लागत से मकान भी तैयार करवाया गया है. जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि यदि डीपीओ के परिवार के अन्य सदस्यों के खातों की जांच हो तो कई और बड़े मामले सामने आएंगे. अब जिलाधिकारी आगे की कार्रवाई करने में जुट गए हैं और इसकी रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को भेजी जा रही है ताकि विभागीय और कानूनी कार्रवाई शुरू हो सके.
क्या है जांच रिपोर्ट की मुख्य बातें
जांच टीम में शामिल उप विकास आयुक्त, वरीय कोषागार पदाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय, कार्यपालक अभियंता एलएईओ-1 ने अपनी रिपोर्ट में कहां है कि अजीत कुमार हरिजन को यह ज्ञात था कि एकमा का कर्णपुरा के रहनेवाले शिकायतकर्ता रवि कुमार राम शिक्षा विभाग में संवेदक का कार्य करते हैं. इसके बावजूद उनके तथा उनके रिश्तेदारो के बीच राशि का लेन-देन हुआ. यह बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के विरुद्ध है. इसमें स्पष्ट किया गया है कि कोई सरकारी कर्मचारी, सरकार या तय सक्षम प्राधिकार की पहले से स्वीकृति या अनुमति के बिना अपने परिवार के किसी सदस्य या अपनी तरफ से काम करने वाले किसी दूसरे व्यक्त्ति से न तो कोई गिफ्ट स्वीकार करेगा और न ही स्वीकार करने देगा.
स्टेटमेंट में आय से अधिक संपत्ति का खुलासा
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगस्त 2023 से अप्रैल 2026 के दौरान कुल 32 माह का इनका वेतन 27 लाख 43 हजार 040 रूपये होता है, जबकि उनके तथा उनकी पत्नी के खाते में उस अवधि में कुल दो करोड़ 51 लाख छह हजार 562 रूपये मिला है. इससे स्पष्ट होता है कि अजीत कुमार हरिजन द्वारा आय से अधिक संपत्ति अर्जित की गई है.
पत्नी के नाम पर 120 कट्ठा जमीन खरीदी
जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट है कि अजीत कुमार हरिजन द्वारा अपनी पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर 41 लाख 50 हजार रूपये में छह बीघा नौ कठ्ठा आठ धूर जमीन खरीदा गया है. सेवा की इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी मात्रा में जमीन की खरीद एवं उनके बैंक खातों में जमा राशि उनकी ज्ञात आय से अधिक है.
पूरे परिवार-संबंधियों की जांच की अनुशंसा
अधिकारियों ने इस मामले में डीपीओ, उनकी पत्नी व परिवार के सदस्यों के नाम से अन्य बैकों में संचालित खाता की जांच समक्ष प्राधिकार तथा उनके नाम पर क्रय किये गये भूमि की जांच अवर निबंधन पदाधिकारी, सारण से कराने की अनुशंसा की है.
Saran DPO Bribery Case का ऐसे हुआ था पर्दाफाश
यह मामला अप्रैल 2026 का है. जिला लोक शिकायत कोषांग में सुनवाई के दौरान रवि कुमार राम के द्वारा बताया गया कि वे पूर्व से शिक्षा विभाग के कई कार्यो के लिए संवेदक के रूप में कार्य करते थे. उसी दौरान उनकी मुलाकात अजीत कुमार हरिजन से हुई. डीपीओ ने उन्हें जिला स्तर पर बड़े पैमाने पर कार्य करने के लिए प्रेरित किया और ₹12.5 लाख की मांग की. संवेदक उनकी बातों में आ गया और तीन किस्तों में ₹10.70 नगद राशि एवं परिवार के सदस्यों एवं रिश्तेदार के विभिन्न मोबाइल नंबर पर अलग अलग समय पर एक लाख तीन हजार 480 रुपये भुगतान कर दिया. उसने 16 हजार 520 रुपये का भुगतान बकाया रखा.
आरोप है कि राशि मिलने के बाद डीपीओ संवेदक को काम देने में आनाकानी करने लगे. एक-दो माह में काम कराने का कई बार आश्वासन दिया गया. बाद में कई बार काम मांगने से तंग आकर उन्होंने अपने और अपने चचेरे भाई के मोबाइल से एक लाख 53 हजार 800 रुपये डिजिटली भुगतान किया. बाकी राशि मांगने पर धमकी देने लगे और बोलने लगे कि उसे सारण सहित अन्य जिले से भी ब्लैकलिस्टेड करा देंगे. काम नहीं करने देंगे. तब जाकर रवि कुमार राम ने जिला लोक शिकायत कोषांग में मुकदमा दर्ज कराया.
रवि ने इनके खाते में भेजे थे रुपए
- 26 मार्च 2024 – पूजा कुमारी (पत्नी) को ₹30 हजार
- 22 जून 2024 – गुड्डू हरिजन (भाई) को ₹800
- 12, 26 मई 2024 – रविकांत राम (साला) ₹5000 एवं ₹100
- काजल कुमारी (भतीजी) पिता राजू राम उर्फ श्रीकांत राम को विभिन्न तिथियों को 25 से अधिक ट्रांजैक्शन में करीब ₹200000 भेजे
- योगेन्द्र मांझी (तत्कालीन ड्राइवर) को तीन ट्रांजैक्शन में ₹10 हजार से अधिक दिया गया
लोक शिकायत कोषांग ने डीपीओ को बताया था दोषी
लोक शिकायत निवारण कोषांग ने अपने जजमेंट में कहा था कि अजीत कुमार हरिजन ने बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के प्रावधानों के विपरीत कार्य किया है. परिवादी द्वारा भी लोक सेवक को प्रभावित करने के लिए रिश्वत की राशि दी गई है. इस कार्य के लिए वे भी दोषी हैं. उनके विरुद्ध भी विधि सम्मत कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है.
हालांकि अजीत कुमार हरिजन ने पहले इस पूरे लेन-देन को व्यक्तिगत और अन्य कारणों से जुड़ा बताया था. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया था कि बकाया भुगतान के विवाद और न्यायालय में चल रहे मामले के दबाव में रवि कुमार राम ने यह परिवाद दायर किया है.
