2002 में हुई थी घटना, दोनों ओर से हुई फायरिंग में चार की हो गयी थी मौत
बाल-बाल बचे थे तत्कालीन एसपी कुंदन
छपरा (कोर्ट) : 2002 में हुए चर्चित जेल ब्रेक कांड मामले में एडीजे द्वितीय के कोर्ट में दो गवाहों की गवाही हुई. गवाहों का अभियोजन के द्वारा परीक्षण किया गया. वहीं, बचाव पक्ष ने प्रतिपरीक्षण किया. बुधवार को एडीजे द्वितीय विजय आनंद तिवारी के कोर्ट में जेल ब्रेक मामले के सत्रवाद संख्या 396/03 में दो गवाहों को अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किया गया. पेश होने वाले साक्षियों में बीएमपी के आरक्षी अश्वनी कुमार तथा एक कैदी अमर चतुर्वेदी ने अपनी-अपनी गवाही कोर्ट के समक्ष दिया.
साक्ष्य की प्रक्रिया के उपरांत कोर्ट ने अगले साक्ष्य के लिए 31 मार्च की तिथि निर्धारित किया है. गौरतलब है कि मंडल कारा के तत्कालीन काराधीक्षक विपिन कुमार सिंह ने भगवान बाजार थाना कांड संख्या 46/2002 में एक प्राथमिकी दर्ज करायी थी. इसमें कहा था कि 17 मार्च, 2002 को कुछ कैदियों को अन्यत्र जेल में स्थानांतरित किया जाना था. इसको लेकर कुछ कैदियों द्वारा जेल कर्मियों को बंधक बना कारा पर कब्जा कर लिया गया.
तत्कालीन डीएम और एसपी कैदियों को समझाने गये तो उन पर पथराव व फायरिंग की गयी. इसमें तत्कालीन एसपी कुंदन कृष्णन पत्थर से घायल हुए. वहीं दोनों पदाधिकारी के अंगरक्षक फायरिंग में बाल-बाल बचे थे. इसके बाद हुई पुलिसिया कार्रवाई में अशोक उपाध्याय, शशिभूषण सिंह, संजय राय ओर वकील राय की मौत हो गयी थी.
