''नैनवा काहे ला ढारे ल तू लोर'' से सुनायी अपनी पीड़ा

गांधी स्मारक पुस्तकालय में हुई मासांत काव्य गोष्ठी हाजीपुर : रविवार की शाम अपनी परंपरा के अनुरूप गांधी स्मारक पुस्तकालय के तत्वावधान में मासांत काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत कवि नागेंद्र मणि के द्वारा सुनायी गयी एक हास्य-व्यंग्य की कविता से हुई. उसके बाद उन्होंने ‘कईसे उनका से मिले जइये हो […]

गांधी स्मारक पुस्तकालय में हुई मासांत काव्य गोष्ठी

हाजीपुर : रविवार की शाम अपनी परंपरा के अनुरूप गांधी स्मारक पुस्तकालय के तत्वावधान में मासांत काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत कवि नागेंद्र मणि के द्वारा सुनायी गयी एक हास्य-व्यंग्य की कविता से हुई. उसके बाद उन्होंने ‘कईसे उनका से मिले जइये हो राम’ शीर्षक गीत सुना कर सभी को भाव-विभोर कर दिया. इसके बाद सत्येंद्र कुमार ने अपनी कविता बचपन अब मुठभेड़ हुआ पढ़ी.
कवि मेदिनी कुमार मेनन ने गुरु जी की कृपा से कविता का पाठ किया. अरविंद पासवान न बच्चों के उत्पीड़न पर अपनी कविता बच्चे की निम्न पंक्तियां पढ़ी- छोटी-छोटी बातों पर पीटते है पापा-रोने भी नहीं देते जनाब. इसके बाद बज्जिका कवि हरिविलास राय ने ‘नैनवा काहे ला ढारे ल तू लोर’, सुना कर रसभेद कराया.
तत्पश्चात विनय कृष्ण काले बादल, एनएन सरस्वती, मनोरंजन वर्मा आदि ने अपनी-अपनी उत्कृष्ट रचनाएं प्रस्तुत की. कार्यक्रम के अंत में पं सिद्धिनाथ मिश्र ने धूमिल की तीन कविताओं का आवृति पाठ कर कार्यक्रम को उत्कर्ष पर पहुंचा दिया, जिसमें उन्होंने पढ़ा कि कविता भाषा में आदमी होने की तमीज है. वह तीसरा आदमी कौन है, मेरे देश की संसद मौन है आदि-आदि. अंत में सचिव भोलानाथ ठाकुर ने आगंतुक कवियों का धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता पं सिद्धिनाथ मिश्र ने तथा संचालन मनोरंजन वर्मा ने किया. श्रोता दीर्घा में अनिल लोदीपुरी, विंदेश्वरी सिंह, अनाम विश्वजीत आदि उपस्थित थे.

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