छपरा (सदर) : अपनी कमियों को एवं ऊर्जा की अनावश्यक बरबादी रोकने के बदले विद्युत दरों में बढ़ोतरी करना उपभोक्ताओं के साथ अन्याय होगा. फिलामेंट बल्ब से उपभोक्ता सीएफएल तो अब एलइडी पर आ गये हैं. परंतु, अपनी विद्युत क्षति रोकने व उपभोक्ताओं को बुनियादी सुविधा देने में विफल पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी अनावश्यक बोझ आगामी वर्ष 2016-17 से 2018-19 तक न डाले.
ये बातें सारण प्रमंडल के उपभोक्ताओं ने विद्युत विनियामक आयोग बिहार के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों व पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के पदाधिकारियों के साथ जन सुनवाई के दौरान समाहरणालय सभाकक्ष में शुक्रवार को कहीं. विद्युत उपभोक्ता संघ के कृष्ण मुरारी ने कहा कि कंपनी के कर्मी उपभोक्ताओं को उपभोक्ता नहीं समझ बोझ समझते हैं. उन्हें कंपनी के प्रति अपने दायित्वों में कठिबद्धता का अभाव दिखता है.
पश्चिमोत्तर बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स के सचिव पवन कुमार अग्रवाल ने कहा कि अब जब कोयले का दाम घटा है, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर विद्युत की दरों में भी कटौती हुई है. वैसी स्थिति में अपनी गलतियों के कारण 40 फीसदी विद्युत बरबाद करनेवाली कंपनी द्वारा टैरिफ की दर आठ से 11 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव बेमानी है. उन्होंने कहा कि आयोग ने पूर्व में ही मीटर के लिए सिक्युरिटी मनी जमा करनेवालों को ब्याज देने का निर्देश दिया गया था.
परंतु, अब तक उस पर अमल नहीं हुआ. इन्होंने उपभोक्ता शिकायत निवारण केंद्र, मुजफ्फरपुर के बदले सारण प्रमंडल के लिए छपरा में स्थापित करने की मांग की. रोटरी सारण के श्याम बिहारी अग्रवाल ने कहा कि पहले फिलामेंट बल्ब पर विद्युत ज्यादा खर्च होता था. अब लोग एलइडी बल्ब लगा रहे हैं. ऐसी स्थिति में न्यूनतम विद्युत दर निर्धारित करने का कोई तात्पर्य नहीं है. उपभोक्ताओं को विद्युत खर्च के आधार पर बिल देने की व्यवस्था की जाये. रवि कुमार ने शत-प्रतिशत मीटर रीडिंग करने की जरूरत जताते हुए औसत बिल देने को उपभोक्ताओं के साथ बेमानी का रवैया करार दिया. शंकर शरण श्रीवास्तव, उदय शंकर सिंह ने कहा कि टैरिफ पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी की आय एवं व्यय के बीच गैप को पूरा करने के लिए कंपनी को आवश्यक उपाय करना चाहिए. इस अवसर पर माधवेंद्र तिवारी आदि तमाम उपभोक्ताओं ने बारीकियों से अपनी समस्याओं को रखा.
उपभोक्ताओं को मिलेगी बेहतर सुविधा : मुख्य अभियंता : नाॅर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के मुख्य अभियंता (वाणिज्य) पुरुषोत्तम प्रसाद ने कहा कि अपनी कमियों को दूर कर उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जायेगा. विगत दो वर्षों में 10 फीसदी विद्युत की बरबादी रोकने में सफलता पाकर इसको 31 फीसदी पर लाया जा सका है. वहीं, मीटर रीडिंग एवं उपभोक्ताओं के बिल उपलब्ध कराने के लिए रिलायंस कंपनी के माध्यम से सैफ के माध्यम से बिल भेजने की व्यवस्था की जा रही है. स्थानीय स्तर पर कुछ कमियों के कारण ही बिल समय पर नहीं निकल पाता है और न वितरित हो पाता है.
अभी 30 फीसदी उपभोक्ताओं को विद्युत बिल उपलब्ध कराया जा रहा है. इसे 2019 तक शत-प्रतिशत करने का प्रयास किया जायेगा. वहीं, अब कनीय अभियंता एवं एसडीओ के भी औसतन 95 फीसदी पर भर दिये गये हैं. ऐसी स्थिति में अगले दो वर्ष में 28 फीसदी पर लाया जायेगा. विभिन्न विद्युत संग्रहण केंद्रों पर भी उपभोक्ताओं की सुविधा के मद्देनजर बुनियादी सुविधाएं यथा शेड जलापूर्ति, शौचालय आदि की व्यवस्था करने के साथ-साथ ऑन लाइन बिल जमा करने का प्रयास भी किया गया है.
उन्होंने कहा कि हमने कई विद्युत कनेक्शनों में विद्युत टैरिफ नहीं बढ़ाया है. वहीं, एमएमसी भी खत्म कर दिया है. हमने तीन वर्षों 2016 से 2019 तक के लिए मामूली 8 से 11 फीसदी टैरिफ दर में बढ़ोतरी का प्रस्ताव आयोग के समक्ष रखा है. हमें प्रति वर्ष 1179 करोड़ राजस्व की क्षति हो रही हैं. इससे पूर्व कंपनी के पदाधिकारी ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से टैरिफ बढ़ोतरी के प्रस्तावों की व्याख्या की.
उपभोक्ताओं के सुझाव सराहनीय : अध्यक्ष : बिहार विद्युत विनियामक आयोग के अध्यक्ष एससी नेगी ने कहा कि जन सुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं के द्वारा उठाये गये कई मुद्दे सराहनीय हैं. उपभोक्ताओं को विद्युत संग्रहण केंद्र पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना, मीटर रीडिंग, विद्युत विपत्र नियमित वितरण सभी उपभोक्ताओं को करना उनकी जिम्मेवारी है.
आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि उपभोक्ताओं का यह कहना कि विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था काफी सुधरी है, परंतु, गुणवत्ता को लेकर शिकायत है. ऐसी स्थिति में आयोग उपभोक्ताओं की इन जायज मांगों को हर संभव उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा. इस दौरान दर्जन भर उपभोक्ताओं द्वारा विद्युत विभाग के द्वारा मनमाना बिल बिना मीटर रीडिंग भेजे जाने की शिकायतों पर आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि जब शहर की यह दशा है, तो ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.
इस अवसर पर आयोग के सदस्य एससी झा, उपनिदेशक कार्मिक राजीव अमित, लक्ष्मण भगत व आयोग के अन्य पदाधिकारी के अलावा जिला आपदा प्रबंधन सह विद्युत के प्रभारी पदाधिकारी शिवशंकर पड़ित, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता व सभी अन्य स्थानीय विद्युत विभाग के पदाधिकारी उपस्थित थे.
