सुपारी लेकर हत्याएं करता है बुच्चुन

सितंबर, 2015 में ही हुई थी इनाम की घोषणा दूसरे इनाम के लिए सीवान एसपी ने भी की है अनुशंसा दीपक की हत्या की सुपारी तीन लाख में ली थी छपरा (सारण) : जिले के रसुलपुर थाना क्षेत्र की असहनी पंचायत की सरपंच रानी देवी के पति दिलीप यादव की हत्या करनेवाले सुपारी किलर बुच्चुन […]

सितंबर, 2015 में ही हुई थी इनाम की घोषणा

दूसरे इनाम के लिए सीवान एसपी ने भी की है अनुशंसा
दीपक की हत्या की सुपारी तीन लाख में ली थी
छपरा (सारण) : जिले के रसुलपुर थाना क्षेत्र की असहनी पंचायत की सरपंच रानी देवी के पति दिलीप यादव की हत्या करनेवाले सुपारी किलर बुच्चुन शर्मा उर्फ रवींद्र शर्मा पर राज्य सरकार पहले ही 50 हजार रुपये के इनाम की घोषणा कर चुकी है. पुलिस अधीक्षक सत्यवीर सिंह की अनुशंसा पर राज्य सरकार ने जिले के दो अपराधियों पर 50-50 हजार रुपये इनाम की घोषणा विधानसभा चुनाव के पहले की थी. एकमा थाना क्षेत्र के रीठ गांव निवासी बुच्चुन शर्मा उर्फ रवींद्र शर्मा पेशेवर अपराधी है,
जो सुपारी लेकर हत्या करने का कार्य करता है. उस पर सीवान पुलिस ने भी 50 हजार रुपये इनाम घोषित करने की अनुशंसा की है. इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जा चुका है.
बुच्चुन को पकड़ने पर मिलेगा इनाम : करीब डेढ दशक से फरार चल रहे बुच्चुन शर्मा को पकड़ने, सूचना देने तथा पकड़वाने में मदद करनेवाले को 50 हजार का इनाम मिल सकता है. उसके बारे में सूचना देनेवाले का नाम गुप्त रखा जायेगा.
सुपारी किलर बुच्चुन के खिलाफ सारण तथा सीवान के विभिन्न थानों में हत्या, लूट, अपहरण, डकैती, राहजनी, चोरी के सामान का व्यापार करने से संबंधित दर्जनों मामले दर्ज हैं. अकेले एकमा थाने में एक, सीवान मुफस्सिल में दो गंभीर अापराधिक मामले दर्ज हैं. इसके अलावा भी दर्जनों मामलों में बुच्चुन शर्मा वांटेड है.
पुलिस ने तेज की छापेमारी : दिलीप हत्याकांड में बुच्चुन शर्मा का नाम सामने आते ही पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी है. बुच्चुन के साथ हत्या में सहयोग करनेवाले उसके दो साथियों की भी पुलिस ने पहचान कर ली है. नाम का खुलासा होने के बाद से पुलिस दर्जनों स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है.
दिलीप व दीपक हत्याकांड बना था अबूझ पहेली : जिस अंदाज में अगस्त में दीपक हत्याकांड को अंजाम दिया गया था, वह काफी दिनों तक पुलिस के लिए अबूझ पहेली बना रहा. इसी तरह 15 जनवरी को हुई दिलीप यादव की हत्या भी पुलिस के लिए कड़ी चुनौती बन गयी थी. दोनों मामलों का उद्भेदन तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ही हो सका.
दीपक हत्या मामले में जिस तरह शक की सूई कई जगह घूम रही थी, उसी तरह दिलीप हत्याकांड में भी शक की सूई कई लोगों की ओर जा रही थी.

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