खूब बज रहे हैं प्रेशर हॉर्न, प्रशासन मौन
छपरा (सदर) : ध्वनि प्रदूषण अधिनियम के मानकों को लागू करने में प्रशासनिक उदासीनता के कारण छपरा शहर के हजारों लोग दिन-रात विभिन्न वाहनों की तेज व लगातार आवाज के कारण विभिन्न मानसिक व श्रवण से संबंधित बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. इसकी मुख्य वजह शहर की घनी आबादीवाले आधा दर्जन मुहल्लों से दिन-रात […]
छपरा (सदर) : ध्वनि प्रदूषण अधिनियम के मानकों को लागू करने में प्रशासनिक उदासीनता के कारण छपरा शहर के हजारों लोग दिन-रात विभिन्न वाहनों की तेज व लगातार आवाज के कारण विभिन्न मानसिक व श्रवण से संबंधित बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. इसकी मुख्य वजह शहर की घनी आबादीवाले आधा दर्जन मुहल्लों से दिन-रात बड़े वाहनों के गुजरने व चालकों द्वारा प्रेशर हॉर्न का बजाया जाना है. हालांकि,
इस संबंध में आमजनों की परेशानियों को समझते हुए डीएम के द्वारा रात में बड़े वाहनों को शहर के बीचो-बीच गुजरने से रोकने व प्रेशर हॉर्न बजाने पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश भी दिया था. परंतु, आम जनों के लिए इस सबसे ध्वनि प्रदूषण की समस्या पर लगाम नहीं लग पाया. हालांकि, इस संबंध में पटना उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से जवाब मांगा है.
इन मुहल्लों के हजारों वासी है त्रस्त : शहर के भिखारी ठाकुर चौक से होते घनी बस्ती पुलिस लाइन, तेलपा, गांधी चौक, सलेमपुर, नगरपालिका चौक, साधनापुरी, गोपेश्वर नगर, रामलीला मठिया, भगवान बाजार, काशी बाजार, श्यामचक आदि मुहल्लो से होते हुए रात के दौरान बड़े-छोटे वाहन के चलने व उनकी तेज आवाज के कारण आस-पास के मकानों में रहनेवाले हजारों लोगों की नींद में जहां खलल पड़ती है, वहीं छोटे-छोटे बच्चे तो इन वाहनों की तेज आवाज के कारण रात में अनायास जगने को विवश होते हैं, जिससे लोगों की श्रवण संबंधी समस्या के साथ-साथ अन्य कई शारीरिक व मानसिक परेशानियां उठानी पड़ रही हैं.
वाहनों के अलावा अन्य कई यंत्र बन रहे प्रदूषण की वजह : वातावरण संरक्षण अधिनियम 1986 तथा ध्वनि प्रदूषण एक्ट-2000 के तहत अनावश्यक ढंग से ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए बिना अनुमति के रात के 10 बजे के बाद तथा सुबह छह बजे से पूर्व ध्वनि उत्पन्न करनेवाले यंत्रों के इस्तेमाल पर रोक लगायी गयी है.
परंतु, बिना अनुमति के ही निर्धारित अवधि के बाद भी विभिन्न मुहल्लों में लाउडस्पीकर, डीजल, जेनेरेटर सेट, पटाखे, डीजे आदि वाद्य यंत्रों का उपयोग किया जाता है. यही नहीं, विभिन्न धार्मिक स्थलों पर भी प्रतिबंधित अवधि में तेज आवाज में ध्वनि विस्तारक यंत्र बजाये जाते हैं, जो निश्चित तौर पर खास कर रात में आम जनों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रहा है.
60 डेसिबल तक ध्वनि सर्वोत्तम : सामान्यत: मनुष्य के लिए 55 डेसिबल तक की ध्वनि उपयुक्त होती है, इससे ज्यादा ध्वनि होने के बाद आदमी को समस्याएं होती है. परंतु, गांधी चौक, सलेमपुर समेत शहर के बीचोबीच गुजरने वाले एनएच के बड़े वाहनों
से रात में 80 से 85 डेसिबल तक
ध्वनि उत्पन्न होती है, जो निश्चित तौर पर लोगों के श्रवण समस्या का कारण बन रही है.
हालांकि सरकार के द्वारा शहर के उत्तर से फोरलेन का निर्माण करा कर जाम एवं ध्वनि प्रदूषण की समस्या से निजात पाने के लिए पांच वर्ष पूर्व प्रयास शुरू किया गया था, परंतु, सरकारी उदासीनता के कारण अब भी यह सड़क निर्माण अधूरा है. ऐसी स्थिति में अब भी राजेंद्र सरोवर, श्यामचक, भगवान चौक के बसनेवाले हजारों लोगों व दर्जन भर निजी क्लिनिकों में रहनेवाले रोगियों को 24 घंटे ध्वनि प्रदूषण की समस्या से जूझना पड़ रहा है.