छपरा (सारण) : जंगली जानवरों नीलगायों और जंगली सूअरों को अब मारने पर कार्रवाई नहीं होगी. पर्यावरण, वन और जलवायु परिर्वतन मंत्रालय ने इन जानवरों को मारने पर लगे प्रतिबंध को समाप्त कर दिया है. यह नियम एक साल के लिए लागू किया गया है. दरअसल, पर्यावरण एवं वन विभाग ने केंद्र सरकार को कहा था कि इन दिनों जानवरों के कारण जान-माल का काफी नुकसान हो रहा है, इसलिए इन्हें वन्य जीव संरक्षण अधिनियम से बाहर किया जाये. केंद्र सरकार ने इस मांग को मानते हुए इन दोनों जानवरों को अनुसूची 3 से हटा कर 5 में शामिल करने की स्वीकृति दी है.
मारने पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं :पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, किसान अपनी फसल या संपति को नुकसान से बचाने के लिए स्वयं आवश्यक निर्णय ले सकते हैं. जरूरत पड़ने पर वे जंगली सूअर या नीलगाय को मार सकते हैं. इस पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम- 1972 की धारा लागू नही होगी. इन्हें मारने पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी.
नहीं देना पड़ेगा मुआवजा :जंगली सूअरों तथा नीलगायों द्वारा हमले में घायल होनेवाले किसान तथा मजदूरों को मुआवजा देने से सरकार को राहत मिलेगी. पिछले वर्ष सारण जिले के मढ़ौरा में एक मजदूर जंगली सूअर के हमले से घायल हो गया था, जिसकी बाद में मौत हो गयी थी. इसके कारण सरकार द्वारा मजदूर की पत्नी को दो लाख रुपये का मुआवजा देना पड़ा था.
क्या कहते हैं अधिकारी
नये नियम के लागू होने से किसानों को फसल की सुरक्षा करने में सहूलियत होगी और जरूरत पड़ने पर जंगली सूअरों तथा नीलगायों को वे मार सकेंगे. इससे जान-माल की क्षति कम होगी.
लाला प्रसाद
