मर्यादा के अनुरूप किया गया हर कार्य यज्ञसंस्कार से ही मनुष्य में देवत्व का होता है उदय: पंडित सतीश शर्मा24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में उमड़ रहे श्रद्धालु नोट: फोटो नंबर 29 सी.एच.पी 6,7 है कैप्सन होगा- दर्शन के लिए खड़ीं युवतियां व हवन करते श्रद्धालु संवाददाता, छपरा (कोर्ट)राजा दशरथ के चारों पुत्रों का जन्म यज्ञ के द्वारा ही हुआ था और उन चारों के द्वारा किये गये कार्य मर्यादित थे, जिसे यज्ञ कहा गया. उक्त प्रवचन सलेमपुर पुलिस क्लब स्थित परिसर में चल रहे 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में प्रवचन के दौरान बाबा सतीश चंद्र शर्मा ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा. हरिद्वार के शांति कुंड से पधारे बाबा ने मानव के संस्कारों पर चर्चा करते हुए कहा कि मनुष्य का संस्कार ही सब कुछ है. संस्कार से ही मनुष्य में देवत्व का उदय होता है, यही मानव का कर्म बीज है. इसका पतन होने पर आदमी पथविहीन हो गलत मार्ग पर चल पड़ता है. इससे वह अपना तथा अपने कुल का नाश कर लेता है. वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए पंडित श्री राम शर्मा आचार्य ने 12 संस्कारों में परिवर्तित कर दिया. उन्होंने संस्कार में पहला पुस्वन संस्कार को बताते हुए कहा कि जब बच्चा अपने मां के गर्भ में तीन माह का होता है, उसी समय उसे यह संस्कार मिलता है जैसे अभिमन्यु, प्रह्लाद, ध्रुव आदि को मिला और वे महान बने. इसके उपरांत जब बच्चा जन्म लेता है, तो उसका नामकरण, अन्नप्रासन्न, मुंडन, विधारंभ और दीक्षा आदि संस्कार दिये गये हैं. पंडित श्री शर्मा ने उपस्थित श्रद्धालुओं से अपील की कि यज्ञ अवधि में उपरोक्त पांचों संस्कार नि:शुल्क प्रदान किये जा रहे हैं. जिन्हें प्राप्त करना है, वे संपर्क कर मुफ्त प्राप्त कर सकते हैं. उक्त अवसर पर उपस्थित रहनेवाले में मंदिर के पुजारी बजरंगी दास, अध्यक्ष धर्मनाथ जी, नगर पर्षद की मुख्य पार्षद शोभा देवी, शशिभूषण गुप्त, विश्वनाथ बैठा, शंभु जी, गुड्डू जी, जयप्रकाश जी आदि थे.
मर्यादा के अनुरूप किया गया हर कार्य यज्ञ
मर्यादा के अनुरूप किया गया हर कार्य यज्ञसंस्कार से ही मनुष्य में देवत्व का होता है उदय: पंडित सतीश शर्मा24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में उमड़ रहे श्रद्धालु नोट: फोटो नंबर 29 सी.एच.पी 6,7 है कैप्सन होगा- दर्शन के लिए खड़ीं युवतियां व हवन करते श्रद्धालु संवाददाता, छपरा (कोर्ट)राजा दशरथ के चारों पुत्रों का जन्म यज्ञ […]
