फोरलेन पर फर्राटेदार सफर का सपना नहीं हुआ पूरा जगह-जगह निर्माण कार्य अधूरा रहने से यात्रियों को उठानी पड़ रही हैं दिक्कतेंनिर्माण कार्य में पांच वर्ष भी पड़ गये कमबढ़ने के बजाय घट गयी वाहनों की रफ्तार हसरत जो नहीं हुई पूरीहाजीपुर से छपरा तक राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन में बदलने की घोषणा के बाद फोरलेन बनने का काम शुरू हुआ, तो लोगों ने फर्राटेदार सफर का सपना बुनना शुरू कर दिया, मगर कई कारणों से फोरलेन निर्माण का कार्य कछुए की चाल की रफ्तार में आ गया, तो यात्रियों की उम्मीदों को आघात लगा. वर्ष 2010 में लगभग 900 करोड़ के खर्च से बननेवाले इस फोरलेन का अभी बहुत काम बाकी है. निर्माण में पांच वर्ष भी कम पड़ गये. 2015 में फोरलेन पर सफर की हसरत अधूरी रह गयी. यात्रियों को न तेज रफ्तार के सफर का आनंद मिला और न ही जगह-जगह लगनेवाले जाम से मुक्ति मिल सकी. नोट: फोटो मेल से भेजा गया है. संवाददाता, दिघवाराहाजीपुर-छपरा फोरलेन सड़क निर्माण कार्य को पूरा होने में पांच साल का वक्त भी काम पड़ गया और इस साल भी यात्रियों के फोरलेन पर फर्राटेदार सफर का आनंद लेने का सपना अधूरा रह गया. सड़क निर्माण की गति धीमी होने से यात्रियों की उम्मीदों को झटका लगा एवं इस वर्ष के अधिकतर महीनों में निर्माण कार्य ठप होने के कारण फोरलेन का निर्माण उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ सका. वहीं, यात्रियों की मुसीबतें भी कम नहीं हुईं. कई कारणों से बंद रहा कामनिर्माण में जुटी कंपनी ने कभी राशि आवंटित नहीं होने का कारण बता कर कार्य को बंद रखा, तो कभी बारिश का मौसम, तो कभी अधिगृहीत भूमि पर कब्जा नहीं होने का कारण बता कर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया. निर्माण का बहुत काम है बाकीफोरलेन निर्माण का अब भी बहुत कार्य अधूरा है. दिघवारा के 17 नंबर रेलवे ढाले के समीप अब भी सड़क का बनना बाकी है. वहीं, मानुपूर के सामने रेलवे ओवरब्रिज निर्माणाधीन है. रेलवे लाइन के दोनों घरों पर सिर्फ पुल के खंभे ही बन सके हैं. इसके अलावा कई जगहों पर सड़क व पुल का निर्माण कार्य पूरा होना बाकी है. बढ़ने के बजाय घट गयी वाहनों की रफ्तारवाहनों की रफ्तार बढ़े एवं कम समय में एक जगह से दूसरी जगहों की दूरियों को तय किया जा सके, इस उद्देश्य से फोरलेन का निर्माण कार्य शुरू हुआ. मगर, निर्माण कार्य बंद रहने से फोरलेन समय पर पूरा नहीं हो सका है. इतना जरूर हुआ है कि जगह-जगह निर्माण कार्य के अधूरा रहने से हाजीपुर-छपरा मार्ग पर दुर्घटनाओं की संख्याओं में इजाफा हो गया है एवं दर्जनों यात्री अब तक अपनी जान गंवा बैठे हैं. वाहनों की रफ्तार बढ़ने के बजाय घट गयी है एवं निर्माणाधीन सड़क पर उड़ रही धूल यात्रियों की सेहत को बिगाड़ रही है. क्या है योजनावर्ष 2010 में भारत सरकार ने हाजीपुर से छपरा-मेथवलिया तक एनएच 19 को फोरलेन में बदलने का निर्णय लिया. काम भी शुरू हुआ. लगभग 60 किलोमीटर के सड़क निर्माण व जमीन अधिग्रहण को मिला कर यह योजना लगभग 900 करोड़ की है. रास्ते में पड़नेवाले 79 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है. जमीन, दुकान व मकान के लगभग स्वामियों को मुआवजा राशि मिल गयी है. समय से बनता फोरलेन, तो होते ये फायदेजगह-जगह लोगों को जाम से मुक्ति मिलतीशहरों में जाम की समस्या दूर होतीधूल से होनेवाली बीमारियों से बचाव होतादुर्घटनाओं की संख्या में कमी आतीहाजीपुर से छपरा की दूरी तय करने में कम वक्त लगतासड़क की दोनों ओर के चंवरों का विकास होताविकास कार्यों में तेजी आतीवाहनों का बोझ कम होता एवं प्रदूषण घटतामरीजों व दुर्घटनाओं के शिकार यात्रियों की जान बचतीरोजगार के अवसरों का सृजन होतासंस्थानों व प्रतिष्ठानों के खुलने से क्षेत्र का चतुर्दिक विकास होता
फोरलेन पर फर्राटेदार सफर का सपना नहीं हुआ पूरा
फोरलेन पर फर्राटेदार सफर का सपना नहीं हुआ पूरा जगह-जगह निर्माण कार्य अधूरा रहने से यात्रियों को उठानी पड़ रही हैं दिक्कतेंनिर्माण कार्य में पांच वर्ष भी पड़ गये कमबढ़ने के बजाय घट गयी वाहनों की रफ्तार हसरत जो नहीं हुई पूरीहाजीपुर से छपरा तक राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन में बदलने की घोषणा के बाद […]
