छपरा(सदर) : सारण जिला पर्षद की अंतिम सामान्य बैठक 17 दिसंबर को होने वाली है. विगत पांच वर्षों के बाद पुन: अप्रैल मई में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत चुनाव होना है. ऐसी स्थिति में निश्चित तौर पर सरकार के प्रावधानों के तहत जिला पर्षद अध्यक्ष के अलावे अन्य 47 सदस्यों में से अधिकतर पदों पर तसवीर बदलने वाली है.
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छपरा(सदर) : सारण जिला पर्षद की अंतिम सामान्य बैठक 17 दिसंबर को होने वाली है. विगत पांच वर्षों के बाद पुन: अप्रैल मई में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत चुनाव होना है. ऐसी स्थिति में निश्चित तौर पर सरकार के प्रावधानों के तहत जिला पर्षद अध्यक्ष के अलावे अन्य 47 सदस्यों में से अधिकतर […]

ऐसी स्थिति में वर्ष 2011 से 16 के के बीच जिला पर्षद की होने वाली अंतिम बैठक को यादगार बनाने व जिला पर्षद की ऐतिहासिक भवन को नया लुक देेने के लिए पर्षद प्रशासन दिन-रात एक किये हुए है. ऐसी स्थिति में अंतिम बैठक में किसी भी प्रकार की बुनियादी सुविधा की कमी जिला पर्षद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व अन्य सदस्यों के द्वारा व्यक्त नहीं किये जाने के मद्देनजर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह डीडीसी की देखरेख में काम चल रहा है.
20 से 25 लाख रुपये खर्च हो रह भवन मरम्मती पर : जिला पर्षद के पुराने मुख्य भवन को नया लुक देने के लिए दिन रात दर्जन भर मजदूरों की देख-रेख में सभी अत्याधुनिक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही है. डीडीसी सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के निर्देश पर जिला अभियंता डीएन दत्ता तथा एसडीओ आरएल साह की देख-रेख में मरम्मती कार्य चलाकर पूरी बिल्डिंग को नया स्वरूप दिया जा रहा है.
पांच वर्ष में महज 9 बैठक : पंचायती राज व्यवस्था के तहत जिला परिषद की सामान्य बैठक हर तीन माह पर होनी चाहिए. परंतु, विभिन्न कारणों का हवाला देकर महज 9 सामान्य बैठक ही हो पायी. वहीं इस दौरान दो अध्यक्ष बदले, एक उपाध्यक्ष जहां बदले गये वहीं एक उपाध्यक्ष के द्वारा अपने पद से इस्तीफा दिये जाने का मामला भी चर्चाओं में रहा.
ऐसी स्थिति में अपने मान-सम्मान व सुविधाओं के लिए लड़ने वाले जन प्रतिनिधियों से आम जन भी उनकी बुनियादी जरूरतों को उपलब्ध कराने की दिशा में उम्मीद जताये हुए है.