Saran News: रक्षाबंधन का त्योहार. बहन की कलाई पर राखी बांधने और भाई की कलाई सजाने की तैयारी. घर में खुशियों का माहौल होना था, लेकिन नियति ने एक परिवार की सारी खुशियां पलभर में छीन लीं. जिस भाई की कलाई पर 23 वर्षीय अंजलि कुमारी सिंह को राखी बांधनी थी, उसी भाई को रक्षाबंधन के दिन अपनी छोटी बहन की चिता को मुखाग्नि देनी पड़ी.
राखी की खुशियां मातम में बदलीं
जिले के दाउदपुर थाना क्षेत्र के बंगरा गांव के बीशेन टोला में रक्षाबंधन के एक दिन पूर्व जहरीले सांप के डंसने से अंजलि की मौत हो गयी. वह दरोगा सिंह की पुत्री थी. घटना की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और देखते ही देखते त्योहार की खुशियां मातम में बदल गयीं.
प्रसाद बांटने निकली थी अंजलि
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को अंजलि पड़ोस के एक घर में पूजा के बाद प्रसाद बांटने गयी थी. वहां से लौटने के दौरान रास्ते में जहरीले सांप ने उसे डंस लिया. सर्पदंश के बाद अंजलि रोती-चिल्लाती किसी तरह अपने घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी. कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ गयी और वह अचेत होकर गिर पड़ी.
अस्पताल में इलाज के दौरान मौत
परिजन आनन-फानन में उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल, छपरा लेकर पहुंचे. चिकित्सकों ने इलाज शुरू किया, लेकिन अंजलि की जान नहीं बच सकी. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया.
राखी की जगह बहन की अर्थी
शुक्रवार को जब अंजलि का शव गांव पहुंचा तो रक्षाबंधन की खुशियां चीख-पुकार में बदल गयीं. जिस दिन बहन के हाथों भाई की कलाई पर राखी सजनी थी, उसी दिन भाई दीपक कुमार सिंह अपनी बहन की अर्थी के सामने बिलख रहा था. जिस हाथ में राखी बंधनी थी, उसी बहन के निर्जीव शरीर को अंतिम विदाई देने की जिम्मेदारी भाई के कंधों पर आ गयी.
बहन को मुखाग्नि देता रहा भाई
बहन को राखी बांधने का इंतजार कर रहे दीपक की आंखों के सामने अब उसकी बहन की अंतिम यात्रा थी. वह फूट-फूटकर रोता रहा. जिस भाई की कलाई पर रक्षाबंधन के दिन बहन के हाथों राखी सजनी थी, उसी भाई ने अपनी बहन की चिता को मुखाग्नि दी. यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर आंख नम हो गयी.
मां समेत पूरा परिवार बेहाल
अंजलि की मौत की खबर मिलते ही मां आशा देवी समेत परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. घर की लाडली बेटी के अचानक चले जाने से परिजन गहरे सदमे में हैं. परिवार के लिए यह पीड़ा और भी असहनीय है कि जिस त्योहार को भाई-बहन के अटूट प्रेम और खुशियों का पर्व माना जाता है, उसी दिन अंजलि हमेशा के लिए सबसे दूर चली गयी.
चार भाई-बहनों में सबसे छोटी
अंजलि दो भाइयों और दो बहनों में छोटी थी. वह परिवार की लाडली होने के साथ-साथ स्वभाव से मिलनसार और पढ़ाई में भी होनहार थी. उसने इंटर तक की पढ़ाई की थी. परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन एक हादसे ने सबकुछ हमेशा के लिए बदल दिया.
अंजलि की मौत से गांव में शोक
अंजलि के पिता दारोगा सिंह घर पर रहकर खेती-बाड़ी करते हैं और इसी से परिवार का पालन-पोषण करते हैं. बेटी की असामयिक मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है. इधर, घटना से बंगरा गांव में भी शोक की लहर दौड़ गयी. ग्रामीणों ने अंजलि की मौत पर गहरा दुख जताया.
परिवार के लिए जिंदगीभर का दर्द
इस परिवार के लिए इस बार रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि जिंदगी भर न भूल पाने वाला दर्द बन गया. जिस दिन भाई की कलाई पर बहन के प्यार की राखी सजनी थी, उसी दिन भाई के हाथों बहन की अंतिम विदाई हुई. अंजलि के हाथों बंधने वाली राखी अब परिवार के लिए उसकी याद और एक ऐसे जख्म की निशानी बन गयी है, जिसकी टीस शायद जिंदगी भर बनी रहेगी.
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