Saran News : बिहार के सारण जिले के मढ़ौरा प्रखंड स्थित गोपालपुर गांव की बेटी दिव्यांशी सिंह ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे बिहार का मान बढ़ाया है. हैदराबाद स्थित एयरफोर्स एकेडमी में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान ग्राउंड ड्यूटी शाखा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर उन्हें देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रतिष्ठित ‘प्रेसिडेंट प्लाक’ से सम्मानित किया.
एनडीए की पहली महिला कैडेट बनीं मिसाल
दिव्यांशी सिंह ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है. वह भारतीय वायुसेना की ग्राउंड ड्यूटी शाखा में कमीशन प्राप्त करने वाली पहली एनडीए महिला कैडेट बन गई हैं. वर्ष 2022 में महिलाओं के लिए एनडीए के द्वार खुलने के बाद उन्होंने परीक्षा उत्तीर्ण कर नई पीढ़ी की महिलाओं के लिए प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त किया.
पुणे से हैदराबाद तक का शानदार सफर
एनडीए में चयन के बाद दिव्यांशी ने पुणे में तीन वर्षों का कठिन प्रशिक्षण पूरा किया. वर्ष 2025 में उन्हें कैडेट क्वार्टर मास्टर सार्जेंट की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसके बाद उन्होंने एयरफोर्स एकेडमी, हैदराबाद में एक वर्ष का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया और 13 जून 2026 को फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में पास आउट हुईं.
पांचवीं पीढ़ी ने संभाली वर्दी की विरासत
दिव्यांशी की सफलता उनके परिवार की गौरवशाली सैन्य और पुलिस परंपरा को आगे बढ़ाने वाली उपलब्धि है. उनके पिता विनोद कुमार सिंह भारतीय वायुसेना में जूनियर वारंट ऑफिसर हैं. दादा लालसाहेब सिंह और परदादा रामदेव सिंह बिहार पुलिस में सेवा दे चुके हैं, जबकि उनके पूर्वज लखन सिंह बंगाल पुलिस में कार्यरत थे. इस तरह दिव्यांशी परिवार की पांचवीं पीढ़ी हैं, जिन्होंने वर्दी पहनकर देशसेवा का दायित्व संभाला है.
केंद्रीय विद्यालयों से की पढ़ाई, भाई IIT दिल्ली में
दो भाई-बहनों में बड़ी दिव्यांशी की प्रारंभिक शिक्षा पिता की नौकरी के दौरान नागपुर, दिल्ली और आदमपुर के केंद्रीय विद्यालयों में हुई. उनकी माता अनीता देवी गृहिणी हैं. वहीं छोटे भाई मनोयोग सिंह सूर्यांश वर्तमान में आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं. परिवार फिलहाल दिल्ली में रहता है, जबकि दादा-दादी पैतृक गांव गोपालपुर में रहते हैं.
सारण और बिहार के लिए गर्व का क्षण
दिव्यांशी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूरे सारण जिले में खुशी की लहर है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता क्षेत्र की बेटियों के लिए नई प्रेरणा बनेगी. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और क्षमता का सशक्त उदाहरण है.
देश की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा
गांव की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनने तक का दिव्यांशी का सफर संघर्ष, अनुशासन और समर्पण की मिसाल है. उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत के दम पर बेटियां किसी भी ऊंचाई को छू सकती हैं.
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