Samastipur News: समस्तीपुर के विद्यापतिनगर क्षेत्र के आम बाग इस बार सूनी डालियों के कारण बागवानों की चिंता बढ़ा रहे हैं. हर साल आम की फसल किसानों के लिए खुशहाली लेकर आती थी, लेकिन इस बार मौसम की बेरुखी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.
मौसम ने बिगाड़ा फसल का संतुलन
बागवानों के अनुसार फरवरी और मार्च में आने वाला आम का मंजर अच्छी पैदावार का संकेत माना जाता है. लेकिन इस वर्ष अचानक बढ़ी गर्मी, असमय बारिश और ठंड की कमी के कारण फूलों का विकास प्रभावित हो गया.
इसका असर यह हुआ कि पेड़ों पर अपेक्षित मात्रा में मंजर नहीं आ सके और जो आए भी, वे टिक नहीं पाए. अब अधिकांश पेड़ों की डालियां सूनी नजर आ रही हैं.
आर्थिक संकट में किसान
विद्यापतिनगर का बैसा गाछी क्षेत्र आम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध माना जाता है. यहां फैले लाखों आम के पेड़ सैकड़ों परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत हैं.
फसल खराब होने से केवल किसानों पर ही नहीं, बल्कि मजदूरों, व्यापारियों और स्थानीय बाजारों पर भी असर पड़ रहा है. आम की खेती से जुड़े लोगों को इस बार भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है.
सफेद मालदह आम की है पहचान
करीब दो हजार हेक्टेयर में फैला बैसा गाछी विशेष रूप से सफेद मालदह किस्म के आम के लिए जाना जाता है. यहां के आम बिहार के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक भेजे जाते हैं.
बागवानों की बढ़ी चिंता
किसानों का कहना है कि वे पूरे साल बागों की देखभाल, सिंचाई और मजदूरी पर हजारों रुपये खर्च करते हैं. लेकिन इस बार फसल नहीं होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
बागवानों ने सरकार से नुकसान का आकलन कर सहायता देने की मांग की है.
