Samastipur News:पुस्तकालय कक्ष को जीवंत रंगों व भित्ति चित्रों से बनाया आकर्षक

अपनी रुचियों को आगे बढ़ाने और अपनी बात कहने के लिए उपयुक्त वातावरण और अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

Samastipur News: प्रकाश कुमार, समस्तीपुर : शहर के आरएसबी इंटर विद्यालय में स्थित सार्वजनिक और विद्यालय पुस्तकालय वास्तव में युवाओं को अपनी क्षमताओं को विकसित करने, अपनी रुचियों को आगे बढ़ाने और अपनी बात कहने के लिए उपयुक्त वातावरण और अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. पुस्तकालय कक्ष की बाहरी व अंदरुनी वाल पेंटिंग इधर से गुजरने वाले किसी को आकर्षित करती है. पुस्तकालय को आकर्षक बनाने के लिए जीवंत रंगों, भित्ति चित्रों, आरामदायक बैठने की जगहों और प्राकृतिक रोशनी का उपयोग किया गया है. छात्रों के सहयोग के लिए स्थापित सुंदर और आकर्षक लाइब्रेरी सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रही है. पुस्तकालय में सजा कर रखी गई किताबें छात्रों को खूब भाती है. पढ़ाई करने के लिए इस लाइब्रेरी से छात्रों काफी सहयोग मिलता है. विद्यालय की अन्य शैक्षिक गतिविधियां बच्चों के भीतर न केवल उत्साह को बढ़ावा दे रही हैं बल्कि उन्हें शिक्षा के लिए भी प्रेरित कर रही है. इस विद्यालय ने पुस्तकालय को विद्यालय का सर्वश्रेष्ठ स्थान बनाने की दिशा में कार्य कर दिया है, जो अन्य के लिए प्रेरणास्रोत है.

पढ़ने के कौशल के विकास में सहायक

शिक्षक महेंद्र प्रसाद एक आवश्यक कौशल है, न केवल स्कूल के लिए, बल्कि जीवन के लिए भी. स्कूल पुस्तकालय अनेक तरीकों से पढ़ने के कौशल के विकास में सहायता करते हैं. पाठ्यक्रम के विषयों से संबंधित पठन सामग्री उपलब्ध कराने से लेकर, चुनिंदा पुस्तकों पर चर्चा और विचार-विमर्श के लिए पुस्तक समूहों का आयोजन करने और विद्यालय समुदाय की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए गए संग्रह से स्वतंत्र रूप से पुस्तकें चुनने की सुविधा प्रदान करने तक, स्कूल पुस्तकालय एक महत्वपूर्ण संसाधन है. एचएम डा. ललित कुमार घोष ने कहा कि स्कूल का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को शिक्षित करना है. पुस्तकालय पाठ्यक्रम से संबंधित संसाधनों की उपलब्धता और उससे जुड़े पठन-पाठन को बढ़ावा देकर इस उद्देश्य में योगदान देते हैं. एक स्वस्थ और अच्छी तरह से उपयोग किया जाने वाला पुस्तकालय किसी विद्यालय की पठन संस्कृति का एक मजबूत संकेतक है.

प्रत्येक कक्षा में शिक्षण कोना बनाये जायेंगे

डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने कहा कि शिक्षक बच्चों के साथ पठन-पाठन संबंधी गतिविधियां भी कराएंगे. जिन विद्यालयों में पुस्तकालय के लिए अलग से कक्ष उपलब्ध नहीं है, वहां प्रत्येक कक्षा में शिक्षण कोना बनाए जायेंगे. बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए सप्ताह में कम से कम दो घंटे पुस्तक पढने का समय निर्धारित करने का निर्देश है. बच्चों को विभिन्न तरह की जानकारी देने के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम से हटकर ज्ञानवर्धक व रोचक पुस्तकें के साथ महान पुरुषों की जीवनी, विज्ञान से संबंधित जानकारी, भूगोल व इतिहास की किताबें शामिल होगी.

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Published by: Krishan mohan pathak

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