Samastipur : बिहार के किसानों से देश को सीख मिलती है : शिवराज सिंह

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यहां अतिथि नहीं बल्कि पूसा विश्वविद्यालय परिवार का हिस्सा हूं.

पूसा . केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यहां अतिथि नहीं बल्कि पूसा विश्वविद्यालय परिवार का हिस्सा हूं. मिथिलांचल की धरती और उसके मुख्य द्वार पर पहुंच कर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं. उन्होंने कहा बिहार के किसानों से देश के किसानों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है. यहां के किसान काफी अनुभवी है. उन्होंने कहा कि दुनिया को ज्ञान का प्रकाश देने वाले इस बिहार को बार-बार प्रणाम करता हूं. उन्होंने कहा कि बिहार वह धरती है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान मिला. आज उसी आधार पर पीएम कहते हैं कि भारत को युद्ध की नहीं बल्कि बुद्ध की जरूरत है. उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि वे अपनी कृषि शिक्षा का प्रयोग अपने जीवन में निश्चित रूप से किसानों और कृषि के क्षेत्र के लिए ही करें. छात्र दुनिया में बड़ा से बड़ा काम कर सकते हैं. उन्हें केवल ईमानदारी से मेहनत करने की जरूरत है. केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में देश में 40 प्रतिशत खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ा है. आज देश के 80 करोड़ परिवारों को फ्री में गेहूं दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कृषि और किसानों के प्रति दूरगामी सोच ही आज देश को कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ा रहा है. बिहार में मशरूम, लीची, मखाना, मछलीपालन, विभिन्न प्रकार की सब्जियों के उत्पादन के क्षेत्र में काफी अच्छा काम हो रहा है. पूसा के कृषि वैज्ञानिकों को छोटे-छोटे कृषि तकनीक यानी मशीन को विकसित करने की जरूरत है. जिससे छोटे किसानों को अधिक फायदा मिल सके. उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन के दौर में पूसा विवि के वैज्ञानिकों की जिम्मेवारी किसानों के प्रति और अधिक बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि पूसा विवि के कृषि वैज्ञानिकों ने बहुत कुछ किया है लेकिन उन्हें समय के अनुरूप और कुछ नया करके दिखाने की जरूरत है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय पूसा देश को कृषि के क्षेत्र में एक नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है. यहां से कृषि शिक्षा ग्रहण करना गौरव की बात है. उपाधि प्राप्त छात्र-छात्राओं को लक्ष्य तय करने की जरूरत है. उन्होंने कहा की बिहार में दलहन तिलहन की खेती तो होती है लेकिन उत्पादन कम है. इस उत्पादन को निश्चित रूप से बढ़ाने की जरूरत है. प्राकृतिक खेती करने के लिए किसानों को जागरूक करने की जरूरत है ताकि मिट्टी के उर्वरा शक्ति को बचाया जा सके. संचालन गरिमा भारती एवं धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय कुमार ने किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: ABHAY KUMAR

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >