Samastipur News:जिले में एड्स से बचाव को लेकर हुए सर्वे में अबतक 67 हॉटस्पॉट चिन्हित

उद्देश्य से प्रोग्रामेटिक मैपिंग एंड पॉपुलेशन साइज़ एस्टीमेशन (पी-एमपीएसई) के तहत गठित समुदाय सलाहकार समिति की दूसरी बैठक हुई.

Samastipur News:समस्तीपुर : एचआईवी/एड्स की रोकथाम और उच्च जोखिम वाले समुदायों की संख्या का सटीक अनुमान लगाने के उद्देश्य से प्रोग्रामेटिक मैपिंग एंड पॉपुलेशन साइज़ एस्टीमेशन (पी-एमपीएसई) के तहत गठित समुदाय सलाहकार समिति की दूसरी बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता संचारी रोग पदाधिकारी सह जिला एड्स नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. विशाल कुमार ने की. बैठक में बिहार ग्रामीण जागरूकता अभियान समिति भी का सहयोग रहा. बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. विशाल कुमार ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूएनएड्स ने एचआईवी/एड्स महामारी बहुल क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी और प्रतिक्रिया के तहत उच्च जोखिम समुदाय की संख्या का अनुमान लगाने की सिफारिश की है.डॉ. कुमार ने कहा कि ये अनुमान नीति निर्माण, संसाधन वितरण और विशिष्ट समूहों की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले हस्तक्षेपों के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण होगा. देश में राष्ट्रीय एड्स और एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एचआईवी/एड्स के लिए उच्च जोखिम समूह जिन्हें माना जाता है, उनमें महिला यौनकर्मी पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुष, नशीली दवाओं का इंजेक्शन लगाने वाले लोग,हिजडा/ट्रांसजेंडर लोग,महिला यौनकर्मी के ग्राहक शामिल है. राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन ने इन्हीं उच्च जोखिम समुदायों के आकार के अनुमानों को समय-समय पर अद्यतन करने के लिए पी-एमपीएसई पद्धति को अपनाया है.बिहार ग्रामीण जागरूकता अभियान समिति के कार्यपालक निदेशक ई. कौशलेंद्र कुमार ने बताया कि अब तक 67 हॉटस्पॉट की पहचान और उच्च जोखिम समूहों की संख्या का आकलन किया जा चुका है.

– दिसंबर के अंत तक जिले के सभी बीसों प्रखंडों के सभी हॉटस्पॉट होंगे चिन्हित

उन्होंने विश्वास दिलाया कि दिसंबर के अंत तक समस्तीपुर जिला के सभी 20 प्रखंडों के अंतर्गत सभी हॉटस्पॉट को चिन्हित कर लिया जाएगा.जिला एड्स नियंत्रण एवं बचाव इकाई के डीपीएम सोनिक प्रकाश ने पी-एमपीएसई को एक स्थायी और व्यवस्थित दृष्टिकोण बताया, जिसका उद्देश्य उन स्थानों को मैप करना है जहां उच्च जोखिम समुदाय एकत्रित होते हैं. डीपीएम कटिहार ने बताया कि भारत ने 2020 और 2022 के बीच 651 जिलों में पी-एमपीएसई का पहला चरण सफलतापूर्वक आयोजित किया, जिससे प्रभावी कार्यक्रम कार्यान्वयन में मदद मिली है. बिहार ग्रामीण जागरूकता अभियान समिति की परामर्शी विशाखा कुमारी ने बताया कि अगले 2 माह के अंदर जिला के अंदर हॉटस्पॉट का आकलन एवं संभावित उच्च जोखिम समूहों की संख्या का पता लगा लिया जाएगा. संस्था सुपौल, सहरसा, बेगूसराय एवं समस्तीपुर जिलों में यह कार्य संचालित कर रही है.राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन द्वारा पी-एमपीएसई का दूसरा चरण अब लागू किया जा रहा है, जिसमें देशभर के लगभग 700 जिले शामिल हैं. यह एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम है और इसका कार्यान्वयन बिहार के सभी 38 जिलों में एचआईवी क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं द्वारा किया जाना है.बैठक में एसटीडी परामर्शी रंजीत कुमार, डीआईएस प्रकाश कुमार समेत अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए. प्रभावी समन्वय के लिए इस बैठक में एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का भी निर्णय लिया गया.

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