समस्तीपुर से प्रकाश कुमार की रिपोर्ट
Samastipur School Teacher Rationalization: जिले के प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने और शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और नीतिगत कदम उठाया है. राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट और नई शिक्षा नीति (NEP) के आलोक में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के लिए शिक्षकों की संख्या का नया मानक तय कर दिया गया है. प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं.
विभाग द्वारा की गई हालिया समीक्षा में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि कई विद्यालयों में तय मानक के अनुसार न्यूनतम शिक्षक भी उपलब्ध नहीं हैं. वहीं, कुछ क्षेत्रों में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है. अब इस विसंगति को दूर करने के लिए बच्चों की वास्तविक नामांकन संख्या, कक्षा संरचना और विषय की आवश्यकता के आधार पर शिक्षकों का नए सिरे से पदस्थापन (रैशनलाइजेशन) किया जाएगा.
प्राथमिक स्तर (कक्षा एक से पांच) के लिए नए नियम लागू
प्राथमिक कक्षाओं के लिए छात्र-शिक्षक अनुपात किसी भी परिस्थिति में 30 छात्रों पर एक शिक्षक से अधिक नहीं होगा. छात्र संख्या के आधार पर पदों का निर्धारण कर दिया गया है. इसके तहत 60 छात्रों तक दो शिक्षक, 61 से 90 छात्रों तक तीन शिक्षक, 91 से 120 छात्रों तक चार शिक्षक, 121 से 150 छात्रों तक पांच शिक्षक निर्धारित किए गए हैं. वहीं, 150 से अधिक छात्र होने पर पांच शिक्षक और एक प्रधान शिक्षक की तैनाती अनिवार्य होगी.
मध्य विद्यालय (कक्षा छह से आठ) में विषयवार होगी तैनाती
कक्षा छह से आठ तक के लिए विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रति कक्षा कम से कम एक शिक्षक का होना अनिवार्य है. इसके साथ ही बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विज्ञान और गणित, सामाजिक अध्ययन, तथा भाषा (सामान्यतः हिंदी) के लिए कम से कम एक-एक शिक्षक की नियुक्ति अनिवार्य की गई है. इसके अलावा छात्र संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त शिक्षकों का भी प्रावधान है.
105 से 140 छात्र संख्या होने पर चौथा अतिरिक्त शिक्षक अंग्रेजी विषय का होगा. वहीं 140 से 175 छात्र संख्या होने पर पांचवां अतिरिक्त शिक्षक छात्रों की मांग और आवश्यकता के अनुरूप संस्कृत या उर्दू विषय का दिया जाएगा. 175 से अधिक छात्र होने पर जरूरत के हिसाब से अन्य अतिरिक्त शिक्षक पदस्थापित किए जाएंगे. विभाग ने साफ किया है कि कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या तय करने के लिए कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 को अलग-अलग शैक्षणिक इकाई माना जाएगा.
समस्तीपुर प्रखंड के स्कूलों को मिलेगी बड़ी राहत
इस नए मानक के निर्धारण से प्रखंड के उन प्रारंभिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होने की पूरी संभावना बढ़ गई है जो लंबे समय से स्टाफ संकट से जूझ रहे हैं. वर्तमान में समस्तीपुर के कई प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां छात्र संख्या के अनुपात में आवश्यकता से अधिक शिक्षक हैं, जबकि कुछ विद्यालय शिक्षकों की कमी का सामना कर रहे हैं.
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