Samastipur Flood: मोहनपुर और मोहिउद्दीननगर प्रखंड क्षेत्र में गंगा और बाया नदियों में लगातार जलवृद्धि से जनजीवन प्रभावित हो गया है. गंगा का जलस्तर वर्ष 2016 के रिकॉर्ड स्तर को छूने के करीब पहुंच गया है. लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण दियारा क्षेत्र के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. खेतों में लगी फसलें जलमग्न हो गयी हैं, जबकि ग्रामीण सड़कों पर पानी बहने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है. लोगों को नाव के सहारे सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ रहा है.
बाया नदी के उफान से मोहिउद्दीननगर प्रखंड की मोहिउद्दीननगर उत्तरी, मोहिउद्दीननगर दक्षिणी और करीमनगर पंचायतों के निचले इलाकों में स्थिति और गंभीर हो गयी है. कई घरों में गंगा का पानी घुस गया है. इसके कारण लोगों को मवेशियों के साथ ऊंचे स्थानों और बांध पर शरण लेनी पड़ रही है. पीने के पानी और पशु चारे की किल्लत भी उत्पन्न हो गयी है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी रफ्तार से जलस्तर बढ़ता रहा तो आने वाले 24 घंटे में स्थिति और विकट हो सकती है. गंगा का जलस्तर वर्ष 2016 के रिकॉर्ड स्तर 48.00 मीटर को भी पार कर सकता है.
47.90 मीटर तक पहुंचा गंगा का जलस्तर
गंगा के सरारी कैंप पर तैनात जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता मनीष कुमार गुप्ता ने शनिवार को बताया कि गंगा का जलस्तर 47.90 मीटर तक पहुंच गया है. यह खतरे के निशान 45.50 मीटर से 2.40 मीटर अधिक है. जलस्तर में वृद्धि की प्रवृत्ति बनी हुई है.
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सोन और कोसी का डिस्चार्ज अन्य दिनों की अपेक्षा शनिवार को कम रहा है, जबकि गंडक नदी में डिस्चार्ज अन्य दिनों की तुलना में कुछ अधिक रहा.
दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट
बीते पांच दिनों से दर्जनों परिवारों की जिंदगी मुश्किल हो गयी है. दिहाड़ी और दैनिक मजदूरी पर निर्भर परिवारों के सामने विकट स्थिति उत्पन्न हो गयी है. पानी से घिरे घरों और ऊंची शरणस्थलियों में रहकर लोग इस प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहे हैं.
प्रभावित परिवारों को सबसे अधिक चिंता पानी से घिरे माहौल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर है. रोज कमाकर परिवार चलाने वाले लोगों के लिए काम बंद होने से रोजी-रोटी का संकट भी गहरा गया है.
8000 हेक्टेयर से अधिक फसल जलमग्न
गंगा और बाया नदियों के बढ़ते जलस्तर का खेती पर व्यापक असर दिखने लगा है. किसानों की महीनों की मेहनत और खेती पर किया गया खर्च बर्बाद होने की स्थिति में है. किसानों के सामने फसल बचाने के साथ लागत वापस पाने की चुनौती भी खड़ी हो गयी है.
मोहिउद्दीननगर के बीएओ दिलीप रजक ने बताया कि प्रखंड क्षेत्र में प्रारंभिक आकलन के अनुसार 5000 हेक्टेयर में फसल जलप्लावित हुई है. वहीं, मोहनपुर के बीएओ राजू कुमार ने बताया कि मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र में करीब 3000 हेक्टेयर में भदई की फसलें जलप्लावित हो गयी हैं. वास्तविक आंकलन नदियों का जलस्तर नीचे उतरने के बाद ही सामने आयेगा.
जिला कृषि पदाधिकारी डॉ सुमित कुमार सौरभ ने प्रखंड की विभिन्न पंचायतों का दौरा कर फसल क्षति का जायजा लिया. उन्होंने बताया कि फसल क्षति के आकलन के लिए कृषि विभाग ने जमीनी स्तर पर कर्मियों को लगाया है. जलवृद्धि से प्रभावित पंचायतों में किसान सलाहकार और कृषि समन्वयकों को अपने-अपने क्षेत्र में जाकर फसल क्षति का आकलन कर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है.
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद विभागीय निर्देश के अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. क्षति आकलन पूरा होने के बाद विभाग के निर्देशानुसार किसानों से फसल क्षति सहायता के लिए आवेदन लिये जायेंगे. मौके पर बीएओ दिलीप रजक और एटीएम धनंजय सिंह मौजूद थे.
एसडीएम ने नाव से प्रभावित पंचायतों का किया दौरा
एसडीएम विकास पांडेय ने अपने मातहत अधिकारियों के साथ गंगा नदी की जलवृद्धि से सर्वाधिक प्रभावित राजपुर जौनापुर और विशनपुर पंचायतों का नाव से दौरा किया. इस दौरान उन्होंने आपदा प्रभावित लोगों की समस्याएं सुनीं.
एसडीएम ने स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी को प्रभावित क्षेत्रों में डोर-टू-डोर मेडिकल मोबाइल टीम भेजने का निर्देश दिया, ताकि लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायी जा सकें. उन्होंने कहा कि जिला और स्थानीय प्रशासन आपदा की इस घड़ी में प्रभावित लोगों के साथ है और आमजन की समस्याओं के निस्तारण के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जा रहा है.
उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि आपातकालीन स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है.
मोहिउद्दीननगर और मोहनपुर में 135 नावों का परिचालन
सीओ विवेक कुमार सिंह ने बताया कि आवागमन में कठिनाई को देखते हुए मोहिउद्दीननगर अंचल क्षेत्र में फिलहाल 80 नावों का परिचालन किया जा रहा है. जिन क्षेत्रों में नाव परिचालन की आवश्यकता है, वहां प्राथमिकता के आधार पर नाव शुरू करने का निर्देश दिया गया है.
वहीं, मोहनपुर प्रखंड में भी 55 नावों का परिचालन किया जा रहा है. इस तरह दोनों प्रखंडों में कुल 135 नावें लोगों के आवागमन में मदद कर रही हैं.
प्रभावित लोगों के बीच पॉलीथिन शीट का वितरण
गंगा और बाया नदियों में जलवृद्धि से प्रभावित लोगों के बीच स्थानीय प्रशासन की ओर से पॉलीथिन शीट का वितरण शुरू कर दिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि पॉलीथिन शीट की कोई कमी नहीं है और आवश्यकता के अनुसार प्रभावित लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है.
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