मुर्गी और बकरी पालन से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, कम लागत में अधिक मुनाफे के बताए उपाय

डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि, पूसा ने जाले में मुर्गी और बकरी पालन पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया. ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए पशुपालन को स्वरोजगार का बेहतरीन जरिया बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रशिक्षण में वैज्ञानिक विधियों, उन्नत नस्लों, पोषण और टीकाकरण पर जोर दिया गया. किसानों को सरकारी योजनाओं और ऋण की जानकारी भी दी गई.

Pusa Agricultural News: डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केंद्र जाले में मंगलवार से उन्नत मुर्गी पालन एवं उन्नत बकरी पालन विषय पर पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ. केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ दिव्यांशु शेखर ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए पशुपालन स्वरोजगार का एक बेहतरीन और सतत जरिया बन सकता है. इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक पशुपालन से जोड़कर उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि करना है. उन्नत मुर्गी पालन की प्रशिक्षण समन्वयक ई. निधि कुमारी और बकरी पालन समन्वयक डॉ पूजा कुमारी ने कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर इसे बेहद लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है.

Poultry Farming: उन्नत नस्ल, संतुलित पोषण और टीकाकरण पर जोर

क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, माधोपुर के वैज्ञानिक डॉ प्रमोद कुमार ने प्रशिक्षणार्थियों को उन्नत नस्लों के चयन, चूजों की देखभाल, संतुलित आहार, जैव-सुरक्षा और टीकाकरण के महत्व से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि स्थानीय मौसम और परिस्थितियों के अनुसार कम लागत में शेड बनाकर बेहतर अंडा व मांस उत्पादन हासिल किया जा सकता है. सही समय पर बीमारियों से बचाव के टीके लगाने से नुकसान का जोखिम शून्य हो जाता है. किसानों को फार्म स्थापना की प्रारंभिक पूंजी, उत्पादन खर्च और सटीक लाभ-हानि की गणना भी सिखाई गई. इसके अलावा सरकारी योजनाओं और बैंक ऋण के माध्यम से इकाई स्थापित करने की पूरी प्रक्रिया समझाई गई.

Goat Farming Self Employment: बकरी पालन की उन्नत वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी

प्रशिक्षण सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी के वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ अभय कुमार सिंह ने उन्नत बकरी पालन की वैज्ञानिक तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला. वहीं पूसा विवि के वैज्ञानिक डॉ विजय कुमार गोंद ने बिहार और विशेषकर दरभंगा क्षेत्र की आबोहवा के अनुकूल बकरियों की उन्नत नस्लों, प्रमुख मौसमी रोगों की रोकथाम और उनके दैनिक पोषण प्रबंधन की बारीकियां साझा कीं. जाले के बेलवारा गांव के प्रगतिशील किसान अनिल कुमार ने भी अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे सुनियोजित प्रबंधन से एक छोटा फार्म बड़े मुनाफे वाले व्यवसाय में बदल सकता है.

Agriculture Training: 60 प्रगतिशील किसानों ने लिया भाग, वैज्ञानिकों का मिला मार्गदर्शन

इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में दरभंगा और आसपास के विभिन्न प्रखंडों से आए कुल 60 किसानों व युवाओं ने हिस्सा लिया. वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को आह्वान किया कि वे पशुपालन को केवल घरेलू जरूरत तक सीमित न रखें, बल्कि इसे बाजार आधारित व्यावसायिक उद्यम बनाएं. कार्यक्रम को सफल बनाने में पौधा संरक्षण वैज्ञानिक डॉ अभिषेक राणा, फार्म मैनेजर डॉ चंदन कुमार सहित संजीव, अमरंजय, मनीष, अभय और अमन का सराहनीय योगदान रहा. केंद्र की ओर से स्पष्ट किया गया कि भविष्य में भी युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसे तकनीकी प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे.

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By Subash chandra ku

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