अवैध निजी अस्पताल: प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में बिना निबंधन और मानकों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित किए जा रहे हैं. इन अवैध क्लीनिकों में न केवल प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है, बल्कि बेखौफ होकर गंभीर बीमारियों के जटिल ऑपरेशन तक किए जा रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता और लचर निगरानी के कारण मरीजों की जान सीधे तौर पर जोखिम में डाली जा रही है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है.
बड़े डॉक्टरों के बोर्ड लगाकर भोली-भाली जनता से छलावा
ग्रामीणों का आरोप है कि गांवों में कुकुरमुत्ते की तरह खुले इन निजी अस्पतालों के बाहर नामी डॉक्टरों और बड़ी-बड़ी डिग्रियों वाले चमकदार बोर्ड टांग दिए गए हैं:
- भरोसे की आड़ में खेल: ग्रामीण क्षेत्रों में उचित स्वास्थ्य जागरूकता न होने के कारण मरीज और उनके तीमारदार इन आकर्षक बोर्डों के झांसे में आ जाते हैं.
- अनहोनी का बड़ा खतरा: प्राथमिक उपचार तक तो बात समझ आती है, लेकिन बिना प्रशिक्षित सर्जन, जरूरी जीवनरक्षक दवाओं और इमरजेंसी बैकअप के ऑपरेशन करना सीधे जानलेवा साबित हो सकता है. यदि टेबल पर किसी मरीज की जान चली जाए तो जवाबदेही किसकी तय होगी.
नियमित जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की उठी मांग
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि प्रखंड क्षेत्र के सभी निजी क्लीनिकों का औचक निरीक्षण किया जाए:
- संसाधनों की पड़ताल: अस्पतालों के वैध निबंधन, डॉक्टरों की मूल डिग्रियों, ऑपरेशन थिएटर की स्वच्छता और मेडिकल उपकरणों की सघन जांच हो.
- हादसे से पहले जागे प्रशासन: ग्रामीणों का कहना है कि किसी बड़ी अनहोनी या मरीज की मौत के बाद खानापूर्ति करने के बजाय विभाग पहले से कड़ा रुख अपनाए. बिना मानक चल रहे सभी अवैध नर्सिंग होम को तत्काल सील कर संचालकों पर प्राथमिकी दर्ज की जाए.
