Makhana Farming Samastipur: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केन्द्र बिरौली में मखाना अनुसंधान एवं विकास उत्कृष्टता केंद्र के सहयोग से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. “मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण तकनीक” विषय पर आयोजित इस सत्र का शुभारंभ केवीके प्रमुख डॉ. एम.एल. मीणा ने किया. इस अवसर पर उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने मखाना फसल के बढ़ते महत्व, इसके पोषण मूल्य तथा समस्तीपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में इसके व्यापक विस्तार की संभावनाओं को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि मखाना किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और निर्यात के लिए बेहद मुफीद फसल है.
Makhana Processing: खेतों में नियमित प्रत्यक्षण और प्रशिक्षण की योजना
डॉ. एम.एल. मीणा ने कहा कि मखाना की खेती को व्यावसायिक रूप देने के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र बिरौली द्वारा किसानों के खेतों पर नियमित रूप से वैज्ञानिक प्रत्यक्षण (डेमो) कराए जाएंगे. इससे आधुनिक कृषि तकनीकों को सीधे खेत तक पहुंचाना आसान होगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि समस्तीपुर सहित पूरे उत्तर बिहार में मखाना की खेती को एक संगठित उद्योग के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर पहल की जाएगी, जिससे किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सके.
उद्यान विशेषज्ञों ने सिखाए उन्नत खेती के तरीके
तकनीकी सत्र में उद्यान विशेषज्ञ डॉ. धीरु कुमार तिवारी ने तालाब आधारित पद्धति के साथ-साथ खेत में मखाना की खेती करने के आधुनिक तौर-तरीकों की जानकारी दी. उन्होंने नर्सरी प्रबंधन, उचित पौध रोपण और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर मखाना की उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों को बढ़ाया जा सकता है. इसके साथ ही फसल उत्पादन विशेषज्ञ भारती उपाध्याय ने मखाना फसल में खरपतवार नियंत्रण और जल प्रबंधन के व्यावहारिक उपायों से किसानों को अवगत कराया.
ड्रोन तकनीक के उपयोग से लागत में कमी
कार्यक्रम के दौरान तकनीकी विशेषज्ञ सुमित कुमार सिंह ने मखाना की खेती में ड्रोन तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि आधुनिक ड्रोन के इस्तेमाल से फसल की नियमित निगरानी, सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव और कीटनाशकों का सटीक उपयोग बहुत कम समय में संभव है. इससे न केवल मजदूरों की निर्भरता और लागत घटती है, बल्कि उत्पादन में भी इजाफा होता है. प्रशिक्षण में विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे प्रगतिशील किसानों ने नवीनतम तकनीकों को समझा और भविष्य में भी ऐसे सत्र आयोजित करने की मांग की.
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