पूसा : डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थित मेला ग्राउंड में तीन दिवसीय किसान मेला के उद्घाटन समारोह को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए पटना विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की दौर में किसानों को अंतर्वर्ती फसलों के तरफ झुकने की जरूरत है. जिससे नगण्य भूमि एवं कम लागत में बेहतर आमदनी प्राप्त हो सके. उन्होंने नो कल्चर विदाउट एग्रीकल्चर का फॉर्मूला बताते हुए कहा किसानों का खेती परंपरागत वजूद है. प्रकृति ने किसानों को बेहतर साधन दिया है. पद्मश्री किसान चाची राज कुमारी देवी ने कहा किसानों को एक जुट होकर खेती करने की जरूरत है. पीएनबी पटना के अंचल प्रबंधक सुधांशु शेखर दास ने कहा कि तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी की ओर से किसानों के दिशा एवं दशा में सुधार लाने की जरूरत है. बीते 130 वर्षों से बैंक सेवा में तत्पर है. डीडीसी संदीप शेखर प्रियदर्शी ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है. डॉ. सुनील पारिक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मेला का महत्वपूर्ण स्थान है. किसानों के हैसियत को एहसास कराने की जरूरत है. कृषि के क्षेत्र में कभी-कभी अभिशाप भी वरदान साबित हो जाता है. इससे पूर्व किसान एवं आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. मयंक राय ने कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि से जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को 20 से 25 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है. समारोह में विषय प्रवेश कराते हुए वैज्ञानिक सह मेला सचिव डॉ. रत्नेश कुमार झा ने कहा कि सम्पूर्ण विश्व ग्लोबल वार्निंग के दौर से गुजर रहा है. जलवायु परिवर्तन से पूरे विश्व का कृषि प्रभावित है. भू-जलस्तर दिनों-दिन गिरते जा रहा है. आगत अतिथि ने कृषि स्मारिका सहित किसान मेला डायरी का विमोचन किया. वहीं बक्सर के गोंद जनजाति के कलाकारों ने नृत्य एवं संगीत की प्रस्तुति की. दूसरी ओर नरकटियागंज के थारू जनजाति के कलाकारों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया.
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