Samastipur News:शिवाजीनगर : अगर इंसान में हिम्मत, मेहनत व आत्मसम्मान हो तो मजबूरी राह रोक नहीं सकती. इसे सच साबित कर रहे हैं भररिया के दिव्यांग हरेराम पासवान. पांव से दिव्यांग होने के बावजूद ट्राइसाइकिल पर भूंजा बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं. तीन बच्चों के पिता ने हालात के आगे हार नहीं मानी. ट्राइसाइकिल पर जुगाड़ से भूंजा की दुकान लगाकर 4 से 5 किलोमीटर का सफर तय करते हैं. मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. उन्होंने बताया कि दस वर्ष पूर्व पेड़ से गिर गये थे. उसी समय पांव से दिव्यांग हैं. घटना के बाद काफी मायूस थे. लेकिन हार नहीं मानी. फिर से उठने का हौसला कायम किया. मेहनत से कमाया गया सम्मानजनक जीवन ही उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है. स्थानीय लोगों के बीच इनके संघर्ष की कहानी प्रेरणा बन रही है. उनसे भूंजा खरीदने वाले ग्राहक व स्थानीय ग्रामीण रंजीत कुमार प्रभात, दीपक पासवान, राजेन्द्र पासवान, रामकृपाल पासवान, परमेश्वर पासवान, राहुल कुमार, सूरज पासवान आदि ने बताया कि हरेराम पासवान मिसाल हैं. उन्होंने किसी के सामने हाथ फैलाने की बजाय स्वाभिमान को तरजीह दी. यह समाज को यह संदेश भी दे रहे हैं कि शारीरिक कमजोरी कभी भी आत्मबल व मेहनत से बड़ी नहीं होती.
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