पंचायत निर्वाचन स्पष्टीकरण: त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन से जुड़े कार्यों में शिथिलता बरतने पर प्रखंड प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी ने निर्वाचन संबंधी डिजिटल एंट्री में लापरवाही बरतने के आरोप में दो कृषि समन्वयकों से स्पष्टीकरण तलब किया है. 7 सितंबर को पत्र जारी करते हुए दोनों कर्मियों को समय सीमा के भीतर कार्य पूरा करने और लापरवाही पर जवाब देने का कड़ा आदेश दिया गया है.
मोबाइल ऐप पर गणना ब्लॉक की एंट्री में बरती घोर सुस्ती
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर 'गणना ब्लॉक' की चौहद्दी के नौ निर्धारित बिंदुओं की ऑनलाइन प्रविष्टि मोबाइल ऐप के माध्यम से आयोग के पोर्टल पर की जानी है:
- तय समय-सीमा: इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा करने की अंतिम तिथि 10 सितंबर निर्धारित की गई है.
- नोडल कर्मियों की तैनाती: बीडीओ द्वारा 2 सितंबर को आदेश जारी कर कृषि समन्वयक गोपाल चौधरी (सुरौली पंचायत) और कृषि समन्वयक आलोक कुमार (नरहन पंचायत) को नोडल कर्मी नियुक्त किया गया था. दोनों की मदद के लिए तकनीकी कर्मी भी लगाए गए थे.
समीक्षा में खुली पोल: औसत से बेहद कम पाई गई प्रगति
प्रखंड कार्यालय द्वारा 6 सितंबर की शाम 6 बजे तक की गई समीक्षा में कार्यों की प्रगति बेहद निराशाजनक पाई गई:
- सुरौली पंचायत: यहां कुल 20 गणना ब्लॉकों में से महज 5 की ही प्रविष्टि दर्ज हो सकी.
- नरहन पंचायत: यहां कुल 27 गणना ब्लॉकों में से केवल 3 ब्लॉकों की ही एंट्री की गई थी.
कार्रवाई की चेतावनी: तय समय में काम पूरा करने का अल्टीमेटम
प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी ने इसे आयोग के कार्यों में घोर लापरवाही और स्वेच्छाचारिता करार दिया है. दोनों कर्मियों को 10 सितंबर तक शत-प्रतिशत प्रविष्टि पूरी करने और देरी का वाजिब कारण बताने का आदेश दिया गया है. चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर निर्वाचन नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा वरीय अधिकारियों से की जाएगी.
