Morwa News: प्रखंड क्षेत्र में जर्जर झोपड़ियों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है. जिलाधिकारी द्वारा 11 जुलाई को जारी निर्देश और आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) के पत्र के बावजूद 15 दिन बाद भी जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है. लोगों का कहना है कि बरसात और तेज हवा के बीच बच्चे अब भी जोखिम भरे केंद्रों में आने को मजबूर हैं.
डीएम ने सुरक्षित भवनों में शिफ्ट करने का दिया था निर्देश
जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी ने 11 जुलाई को निर्देश जारी कर जर्जर झोपड़ियों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को तत्काल किराये के भवन या नजदीकी विद्यालयों में स्थानांतरित करने को कहा था. बताया जा रहा है कि इस संबंध में समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने संज्ञान लिया था और डीपीओ, आईसीडीएस ने भी आवश्यक पत्र जारी किया था.
219 में से 140 केंद्र किराये के भवनों में संचालित
बताया जाता है कि मोरवा प्रखंड में कुल 219 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें 140 केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं. भवन के लिए ₹1,500 तथा झोपड़ी में संचालित केंद्रों के लिए ₹1,000 प्रतिमाह किराया निर्धारित है. ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार मांग उठने के बावजूद जर्जर झोपड़ियों में चल रहे केंद्रों को हटाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है.
ग्रामीणों ने उठाए सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन आदेश जारी होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से शीघ्र कार्रवाई कर जर्जर झोपड़ियों में संचालित केंद्रों को सुरक्षित भवनों में स्थानांतरित करने की मांग की है.
