समस्तीपुर . लुभावने और रोजगार वाले विज्ञापन से सावधान रहे हैं. उसमें दिये नंबर पर संपर्क करने के बाद किसी तरह की आर्थिक गतिविधियां या ट्रांजेक्शन न करें. संभव हो तो संबंधित संस्थान या कंपनी में जाकर पहले पता लगा लें कि वाकई विज्ञापन जारी भी किया गया या नहीं. ऑनलाइन चैटिंग प्लेटफॉर्म पर अनजान व्यक्तियों से चैट करते समय सतर्क रहें. कॉलेजों के युवा कुछ इसी तरह के संदेशों से जागरूक होंगे. कॉलेजों में युवाओं को साइबर सुरक्षा का पाठ पढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जायेगा. इसे लेकर यूजीसी की ओर से कॉलेजों को पत्र भेजकर आदेश जारी किये हैं. साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने के लिए कॉलेजों में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जायेगा. कार्यशालाओं, सेमिनार लगाये जायेंगे. जिसमें साइबर एक्सपर्ट्स के जरिए उन्हें साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क बनाया जायेगा. दरअसल भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ओर से युवाओं को साइबर क्राइम के प्रति जागरूक बनाने और सुरक्षा का पाठ पढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाते हैं. सोशल मीडिया, फर्जी वेबसाइट, मैसेज आदि के जरिए होने वाली धोखाधड़ी के प्रति जागरूक बनाया जायेगा है. यूजीसी के आदेशानुसार कॉलेज पोर्टल के जरिए छात्रों को सरकार की ओर से चलाए जा रहे ऑनलाइन जागरूकता अभियान से जोड़ा जायेगा. पिछले कुछ समय में पढ़ाई के चलते भी इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा है और छात्र इंटरनेट पर कई गुना समय बिता रहे हैं. युवाओं को सतर्क बनाने का प्रयास बेहतर किया जायेगा. महिला कॉलेज प्राध्यापक विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों से छात्रों एवं शिक्षकों में साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए ‘ऑनलाइन सुरक्षित रहें अभियान’ को बढ़ावा देने का आग्रह किया है. साइबर खतरों से बचने के लिए उनके लिए एक हैंडबुक भी तैयार की गयी है. कुल 126 पन्नों की इस हैंडबुक में साइबर हमलों से बचने के लिए क्या करना है, क्या नहीं, इस बारे में विस्तार से समझाया गया है. जैसे, इंटरनेट के इस्तेमाल के दौरान किसी भी ऐप या वेबसाइट पर भरोसा न करना, मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय उसमें एंटी वायरस रखना, कोई भी ऐप या सॉफ्टवेयर अधिकृत स्टोर से जांच-परख के बाद ही खरीदना, अलग-अलग इंटरनेट अकाउंट के लिए अलग-अलग पासवर्ड रखना, और उन्हें बदलते रहना आदि. साथ ही इसमें अपने व्यक्तिगत विवरण और वित्तीय लेन-देन के पिन को सोशल मीडिया या व्हाट्सऐप पर साझा न करने, स्पैम ई-मेल या मित्रता के संदिग्ध अनुरोधों पर प्रतिक्रिया न देने और गुमनाम स्रोतों से आये संदेशों पर क्लिक न करने की सलाह दी गयी है. आयोग के मुताबिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक से अधिक निर्भरता के कारण ही साइबर सुरक्षा पर ध्यान देना इतना महत्वपूर्ण हो गया है. उसका यह भी मानना है कि इस अभियान में शामिल होकर छात्र, अध्यापक और कर्मचारी न सिर्फ खुद को, बल्कि संस्थान और देश को सुरक्षित रखने में भी मदद कर सकते हैं. उसने इस संदर्भ में सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के प्रमुखों को अपने यहां एक व्यवस्था बनाने के लिए भी कहा है. देश में साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूकता पैदा करने में यह अभियान बेहद उपयोगी साबित हो सकता है.
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