Litchi Stink Bug: बिहार में लीची की फसल पर विनाशकारी 'स्टिंक बग' कीट का खतरा मंडरा रहा है. इस गंभीर संकट को देखते हुए डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कीट विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है. विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. एम. एस. साई, डॉ. ध्रुव सिंह और डॉ. पुष्पा सिंह ने किसानों को चेतावनी दी है कि इस कीट के प्रभावी नियंत्रण के लिए व्यक्तिगत प्रयासों के बजाय सामुदायिक स्तर पर एक साथ कदम उठाना बेहद जरूरी है.
फरवरी से मई के बीच चरम पर होता है प्रकोप
वैज्ञानिकों के अनुसार, लीची स्टिंक बग का प्रकोप मुख्य रूप से पुष्पन और फल लगने की अवधि (फरवरी से मई) के दौरान सबसे घातक होता है:
- अंडे और निम्फ: मादा कीट पत्तियों की निचली सतह पर हल्के हरे अंडे देती है, जो फूटने से पहले गुलाबी हो जाते हैं. 5-7 दिनों में निकले चमकीले लाल निम्फ रस चूसते हैं.
- प्रौढ़ कीट का जीवन: ऑफ-सीजन में पेड़ों की छाल में छिपे प्रौढ़ कीट नई पत्तियां आते ही प्रजनन कर पूरे बाग में तेजी से संक्रमण फैलाते हैं.
- फसल को प्रमुख नुकसान: निम्फ और प्रौढ़ दोनों अवस्थाएं रस चूसती हैं, जिससे कोमल टहनियां सूख जाती हैं, पुष्पगुच्छ नष्ट हो जाते हैं और अपरिपक्व फल समय से पहले झड़ जाते हैं.
क्लस्टर और सामुदायिक प्रबंधन अपनाने पर जोर
एडवाइजरी में कहा गया है कि किसी एक किसान के छिड़काव करने से कीट आसपास के अनुपचारित बागों से दोबारा हमला कर देते हैं. इसलिए पूरे क्षेत्र के किसान मिलकर एक साथ समन्वित कीट नियंत्रण उपाय अपनाएं.
सावधानी: वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि फलों में कीटनाशकों के हानिकारक असर को रोकने के लिए 'कटाई पूर्व अंतराल' (PHI) का कड़ाई से पालन करें और नियत समय बाद ही फलों की तुड़ाई करें.
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