Samastipur News: मोहिउद्दीननगर : भारत रत्न सह लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जीवन आम लोगों को सशक्त सशक्त करने और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने में समर्पित रहा. उन्होंने ऐसे देश का सपना देखा जहां समानता, नैतिकता और सुशासन हो. यह बातें शनिवार को मोहिउद्दीननगर बाजार के हृदय स्थल के सभागार में शनिवार को जेपी जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए साहित्यकार प्रो. हरि नारायण सिंह हरि ने कही. कार्यक्रम की अध्यक्षता जेपी सेनानी हरिशंकर सिंह ने की. संचालन जेपी सेनानी रामबहादुर सिंह ने किया. कार्यक्रम का संयोजन संपूर्ण क्रांति 74 जेपी विचार मंच की ओर से किया गया. इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में आज से ठीक 50 वर्ष पूर्व सबसे विवादास्पद व अलोकतांत्रिक दौर था, जिसे आपातकाल के रूप में जाना जाता है. इस अवधि में असहमति को दबाना,सरकारी दमन,मानवाधिकार का उल्लंघन, प्रेस की स्वतंत्रता का हनन जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक भारत के संसदीय इतिहास में इसे काला अध्याय के रूप में जाना जाता है. विभिन्न झंझावातों को झेलते हुए देश में लोकतांत्रिक परंपराओं में आमजन द्वारा आस्था रखने की बदौलत लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हुई है. आपातकाल के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों के मूल्यांकन के बाद भारत का लोकतंत्र समयानुसार परिपक्व होता जा रहा है. सैद्धांतिक रूप से देश के सत्तारूढ़ दल व विपक्ष में मतभेद हो सकता है,किंतु राष्ट्रीय हितों को देखते हुए आम सहमति बनाने की जरूरत है. ताकि विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में मदद मिल सके. देश के युवा संविधान के महत्व को जानने लगे हैं. अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति सजग हो रहे हैं. वर्तमान समय में चुनाव में खर्च के आधार पर आम आदमी राजनेता नहीं हो सकता. लोकतंत्र को व्यावहारिक स्वरूप प्रदान करने के लिए सरकार व राजनीतिक दलों को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे आमजन भी नेतृत्व का अधिकार प्राप्त कर सके. चुनाव के दौरान लगातार घट रही मतदान प्रतिशतता चिंतनीय स्थिति उत्पन्न कर रही है.इसे बढ़ाने के लिए हमें हरसंभव कोशिश करनी चाहिए. इस दौरान आपातकाल के दौरान अपनी जान गंवाने वाले जेपी सेनानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई. इससे पूर्व आगत अतिथियों ने जेपी के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया. वहीं उनके बताये गये रास्ते पर चलने का संकल्प लिया. इस मौके पर गीतकार ईश्वरचंद्र झा करुण, चंद्रशेखर सिंह, रामसिंगार सिंह, भाई रणधीर, प्रो. सुनील सिंह, प्रो. अमरेंद्र कुमार यादव, उमाशंकर सिंह, डॉ. निगहबान अहमद खान, वीरेंद्र राम, इंदु करुण मौजूद थे.
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