नुकसान. आम, लीची के साथ सब्जी की खेती को बड़ा झटका, गरमी से िमली राहत
मुजफ्फरपुर : दिन में गरमी व ऊमस के बाद अचानक सोमवार की शाम में मौसम ने करवट ले ली. तेज आंधी-बारिश के साथ ओले की बौछार होने लगी. करीब दो मिनट तक ओले गिरते रहे. कुछ स्थानों पर 500 ग्राम तक के ओले गिरने की सूचना है. ओला गिरने से शहर में तो कुछ देर के लिए अफरा- तफरी की स्थिति हो गयी. लोग ओला-पानी से बचने के लिए सुरक्षित स्थान की तलाश करने लगे. आंधी पानी से जान माल के नुकसान की सूचना नहीं है. वहीं खपरैल के मकान कई स्थान पर क्षतिग्रस्त हो गये हैं. प्रखंडों में सबसे अधिक ओलावृष्टि मीनापुर, बोचहां, मुशहरी , कुढ़नी, सकरा, मुरौल व कांटी में हुई है. आम व लीची की फसल सबसे अधिक इन प्रखंडों में है.
गरमी से राहत, फसल के लिए आफत. इधर, मौसम के बदलने से गरमी से तप रहे लोगों को राहत मिली है. ठंडी हवा चलने से मौसम सुहाना हो गया. लेकिन, फसल के लिए ओला काल बन
आंधी-बारिश के
कर गिरा है. विशेष रूप से लीची व आम
को काफी नुकसान पहुंचा है. शाही लीची जो पक कर तैयार है, इसमें दाग व कीड़ा लगने का खतरा है. वहीं चाइना के फल झड़ गये हैं. आम के लिए भी ओला काफी नुकसानदायक है. वैसे भी इस साल आम की फसल कमजोर है. ओला गिरने से फल गिरने के साथ दाग आ जायेगा. वहीं ओला से वैशाखी सब्जी के गलने व झुलसने की आशंका है. इससे सब्जी महंगी हो सकती है. दलहन की फसल को क्षति होगी. खास कर मूंग के लिए ओला घातक है.
आम की खेती 32574 हेक्टेयर में, उत्पादन तीन लाख 11 हजार 711 मीटरिक टन
लीची की खेती 21797 हेक्टेयर में, उत्पादन एक लाख 63 हजार मीटरिक टन
