नप. मुख्य पार्षद पद के अनारक्षित होने से चुनावी सरगरमी तेज
समस्तीपुर : समस्तीपुर नगर परिषद के मुख्य पार्षद पद के लिए अनारक्षित (अन्य) निर्धारित होने की घोषणा से यहां वार्ड पार्षद चुनाव की सरगर्मी तेज हो गयी है़ मुख्य पार्षद की कुर्सी पर नजरें जमाये संभावित प्रत्याशियों की रणनीति नई रूप धारण करने लगी है़ माना जा रहा है कि मुख्य पार्षद की कुर्सी को देखते हुए कुछ वार्ड पार्षद स्वयं चुनावी मैदान में आने के साथ घर की किसी महिला सदस्य को भी चुनाव मैदान में उतारने का मन बना लिया है़
निकाय चुनाव के लिए 50 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रावधान से 29 वार्ड वाले नगर परिषद में 15 महिला वार्ड पार्षद होते हैं. हालांकि, वार्ड पार्षदों के लिए नये आरक्षण रोस्टर के अनुरूप इस बार कई वार्ड में आयी तब्दीली से महिला की जगह पुरुषों व पुरुषों की जगह महिलाओं को चुनाव मैदान में भाग्य आजमाने का अवसर प्राप्त होगा़ सूत्रों की मानें तो एक वरिष्ठ पार्षद के परिवार के चार लोग इसबार अलग-अलग वार्ड से चुनाव लड़ने तक की रणनीति बना चुके हैं. आरक्षण के कारण समर में उतरने से वंचित पार्षद को तो फिलहाल राहत है़ वहीं जिन वार्डों में आरक्षण का रंग बदल गया है, वहां का सियासी जंग कुछ अलग ही है़ उमंग के साथ दावेदारों की फौज खड़ी है़
कई वर्तमान वार्ड पार्षदों का चुनावी गणित गड़बड़ाया
नये रोस्टर के अनुरूप महिला सीट आरक्षित होने वाले वार्ड से पूर्व तक चुनाव लड़ने वाले पुरुष अन्य वार्डों में अपनी तैयारी शुरू कर दी है़ इस तरह वर्तमान में कई वार्ड पार्षदों को अपने वार्ड से चुनाव लड़ने से वंचित होना पड़ रहा है़ इस तरह कई वर्तमान वार्ड पार्षदों का चुनावी गणित गड़बड़ा गया है़ सात अप्रैल से निकाय चुनाव के लिए होने वाले नामांकन की तैयारी संभावित प्रत्याशियों द्वारा शुरू कर दी गयी है़ चुनाव लड़ने का मन बना चुके संभावित प्रत्याशी नामांकन संबंधी कागजातों को दुरुस्त करने के लिए अंचल, प्रखंड व नगर परिषद कार्यालय पर देखे जा रहे हैं.
प्रथम दिन से ही नामांकन को पहुंच सकते हैं अभ्यर्थी
माना जा रहा है कि सात अप्रैल से नामांकन प्रारंभ होने के प्रथम दिन से ही कई प्रत्याशी द्वारा नामांकन की जायेगी़ इसके लिए प्रत्याशी शुभ मुहुर्त के लिए पंडितों से सलाह ले रहे हैं. 15 अप्रैल तक होने वाले नामांकन के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारी जोरों से चल रही है.
जनता दरबार अब नहीं होता है़ इसके बावजूद शिकायतों का सिलसिला चल रहा है़ खासकर शहरी क्षेत्र में छुटभैये नेताओं से लेकर संभावित दावेदारों को अपने-अपने वार्ड की समस्याएं सामने लाने में लगे हैं. जिलाधिकारी व सदर अनुमंडलाधिकारी के यहां समस्याओं के निदान को लेकर गुहार लगाने की रफ्तार तेज हो चली है़ फरियाद के मजमून का रंग भी बदलने लगा है़ फरियादी का गणित व फरियाद के फलक में फर्क दिखा. इसमें अधिकांश जलजमाव, गंदगी, नाला की जर्जर हालत, सड़क व रोशनी की व्यवस्था जुड़ी है़ मतलब साफ है़ सियासी रहनुमा अचानक शहर की सुध लेने लगे हैं. लेकिन, मकसद अलग-अलग है़ अधिकांश निवर्तमान पार्षद सफलता का श्रेय खुद ले रहे हैं, तो विफलता का ठीकरा नगर परिषद पर फोड़ रहे हैं. वैसे जिला प्रशासन के पास पहुंचने वाले शिकायतों का पुलिंदा, उम्मीद की टकटकी व निदान के भरोसे के साथ शहर के वार्डों के चेहरे दिखाई पड़ने लगे हैं.
