हेपेटाइटिस बी व सी से बचाव पर सेमिनार का आयोजन
आइजीआइएमस के किडनी रोग विशेषज्ञ ने किया संबोधित
समस्तीपुर : आइजीआइएमस के किडनी रोग विशेषज्ञ डाॅ हर्षवर्धन ने कहा कि हेपेटाइटिस सी जांच कराये बिना उसका खून दूसरे को नहीं चढ़ाया जाना चाहिए. यदि किसी को हेपेटाइटिस सी है उसके उपयोग में लाये जाने वाले रेजर, टूथब्रश के इस्तेमाल से दूसरे को भी हो सकता है. इसी बीमारी के होने का प्रमुख कारण है दूसरे मरीजों के इस्तेमाल में लाये गये सीरिंज का इस्तेमाल करना. ऑपरेशन में उपयोग लाये जाने वाले औजार को यदि ठीक से सर्टलाइजेश नहीं किया जाता है और उसी से दूसरे का ऑपरेशन किया जाता है, तो इससे भी हो सकता है. यदि कोई महिला या पुरुष इस बीमारी से ग्रसित हैं, तो वे इस दौरान यौन संबंध बनाने से परहेज करें. इससे भी यह बीमारी हो सकती है. वे शनिवार की रात आइएमए भवन में आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे.
डॉ एसी सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित इस सेमिनार का सचालन आइएमए के उपाध्यक्ष डॉ डीएस सिंह ने किया. सेमिनार में बताया गया कि हेपेटाइटिस बी व सी एड्स से भी खतरनाक बीमारी है. देश में सौ में एक मरीज प्रतिदिन इससे ग्रसित पाये जाते हैं. प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ संजीव कुमार ठाकुर ने हेपेटाइटिस बी पर विस्तार से प्रकाश डाला. हेपेटाइटिस सी के लक्षणों की चर्चा करते हुए डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि बुखार, पेट दर्द, जी मिचलाना, उल्टी होना, हमेशा थकान महसूस होना, सिर में दर्द रहना, डिप्रेशन महसूस होना, डार्क कलर का पेशाब होना, जोड़ व मसल में दर्द, जॉ डंस आदि होना इसका प्रमुख लक्षण है. इस कार्यक्रम के साइंटिफिक चेयरमैन शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक डाॅ आरआर झा थे. मौके पर डाॅ मोनिका सिंह, डाॅ गोविंद प्रसाद, डाॅ सुजीत कुमार, डाॅ केडी झा, डाॅ एनके भारतीय, डॉ एनके ठाकुर, डाॅ जीसी कर्ण, डाॅ आरएन मेहता, डाॅ फुलेंद्र भगत, डाॅ डीके मिश्र, डाॅ स्मिता झा, डॉ बीएन प्रसाद, डाॅ उपेंद्र सिंह, डाॅ चंद्रमणि, डाॅ एके गुप्ता, डॉ निशांत, डाॅ एपी सिन्हा, डाॅ एके आदित्य समेत काफी संख्या में डॉक्टर मौजूद थे.
