उच्चा दर बाबे नानक दा, मेरा सतगुर यार गरीबा दा...

समस्तीपुर : संगत सतनाम वाहेगुरु जी का जयघोष करते हुए चल रही थी, बैंड बाजे की मधुर धुनें हर किसी को लुभा रही थी. श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पालकी पर संगत फूलों की वर्षा कर रही थी. श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पाठ रखने के बाद अरदास हुई. सुबह से लेकर देर […]

समस्तीपुर : संगत सतनाम वाहेगुरु जी का जयघोष करते हुए चल रही थी, बैंड बाजे की मधुर धुनें हर किसी को लुभा रही थी. श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पालकी पर संगत फूलों की वर्षा कर रही थी. श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पाठ रखने के बाद अरदास हुई. सुबह से लेकर देर शाम तक ‘वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी फतेह’ से शहर गूंजता रहा. मौका था सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी के 547 वें प्रकाश पर्व का.

फूलों से सजी श्री पालकी साहिब आकर्षण का केंद्र थी. महिला संगत श्री गुरवाणी जी का शबद गायन कर रही थी, मिटी धुंध जग चाणन होया, उच्चा दर बाबे नानक दा, मेरा सतगुरु नानक प्रकटया, मेरा सतगुर यार गरीबा दा आदि अनमोल शब्दों का गायन कर विभिन्न धार्मिक कीर्तनी जत्थे ने शहरवासियों को धार्मिक रंग में सराबोर कर दिया.

गुरु पर्व को लेकर शहर के गुरु द्वारा में श्रीगुरु ग्रंथ साहब का पाठ आरंभ किया गया. इनका भोग बुधवार को गुरु पर्व के दिन डाला गया. इस दौरान गुरु द्वारा में सारा दिन लंगर चलता रहा. धन धन भाग हमारे घर आया पीर मेरा..सबद गायन से हुई. मुख्य ग्रंथी ने गुरु की वाणी की महिमा के बारे में बताया.

श्रद्धालुओं को गुरु नानक जी के संदेश नाम, कीरत और वंड के चखना को आत्मसात करने को कहा. हुजूरी रागी जत्था ने तेरे भरोसे प्यारे मैं लाड लगाया..सबद गायन किया. गुरु द्वारा श्री गुरू नानक सिंह सभा माड़वारी बाजार की ओर से साहिब श्री गुरूनानक देव जी महाराज का तीन दिवसीय प्रकाशोत्सव मनाया गया.

गुरुद्वारा अध्यक्ष सरदार बलवंत सिंह ने बताया कि गुरु नानक जी को हिन्दू अपना गुरु मानते थे और मुसलमान अपना पीर कहते थे. गुरु नानक जी ने जात-पात, ऊंच-नीच के नाम पर हो रहे खून-खराबे का विरोध किया. लोगों को अधर्म के रास्ते पर चलने से रोका. सभी को प्रेम, सद्भाव से जीने का संदेश दिया. उन्होंने बताया कि कैसे 12 वर्ष की आयु में उनके पिता जी ने उन्हें केवल 20 रुपये देकर व्यवसाय करने को कहा. उन्होंने उस पैसे से गरीब लोगों को खाना खिला दिया.

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