परंपरागत कृषि को तकनीक में बदलने की जरूरत

समस्तीपुर : जोखिम के डर से आज भी किसान पंरपरागत खेती में ही जुटे हुये है. जरुरत है किसानों की इस जोखिम को कम कर उन्हें तकनीकी खेती के औैर मोड़ने की. सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहंचने के बाद ही इसमें सफलता पाई जा सकती है. सिर्फ खानापूर्ति करने से किसानों की […]

समस्तीपुर : जोखिम के डर से आज भी किसान पंरपरागत खेती में ही जुटे हुये है. जरुरत है किसानों की इस जोखिम को कम कर उन्हें तकनीकी खेती के औैर मोड़ने की. सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहंचने के बाद ही इसमें सफलता पाई जा सकती है. सिर्फ खानापूर्ति करने से किसानों की स्थिति नहीं सुधर सकती है.

उक्त बातें जिलाधिकारी प्रणव कुमार ने नगर भवन में आयोजित रबी कार्यशाला सह प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन करते हुये कही. वहीं उन्होंने कहा कि विदेशों में तकनीक के विकास के कारण औसत पैदावार में दस गुणा से अधिक की बढ़ोतरी हो सकी है. भविष्य में विकास तभी संभव हो सकता है जब हम कृषि का विकास कर सकेंगे़ आज भी जिला की 70 से 80 फीसदी की जीविका का साधन खेती पर ही निर्भर है.

प्रत्यक्षण वाली जगह को ऐसे विकसित की जाये कि वह दूसरे किसानों के लिये भी उदाहरण हो. जो किसान व प्रखंड समन्वय बेहतर कार्य करे. उसे पुरस्कृत किया जाये .जिससे इनका मनोबल बढे. बीज के उत्पादन करने वाले किसानों को चिन्हित कर उसे सहयोग दिया जाये. अध्यक्षता करते हुयेे जिला कृषि पदाधिकारी रविंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि रबी के लिये तय लक्ष्य को हर हाल में पाने के लिये कार्य करें.

जिससे अधिक से अधिक किसानों को योजनाओं का लाभ मिल सके. मौके पर उपविकास आयुक्त अफजालुर रहमान, आरएयू पूसा के वैज्ञानिक बीके द्विवेदी, शैलेश कुमार, पंकज कुमार, आत्मा के परियोजना निदेशक सुधीर कुमार राय, सहायक निदेशक उधान ओम प्रकाश मिश्रा, पौधा संरक्षण कन्हैया प्रसाद, अजय कुमार, मो. अब्दुल्ला, चेतन ,भुवनेश मिश्रा सहित सभी प्रखंडों के प्रखंड विकास परियोजना पदाधिकारी शामिल थे.

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