समस्तीपुर : भूकंप के मानकों की अनदेखी हम सदा से करते आये हैं. जिले में आग व भूकंप, दोनों से सुरिक्षत निर्माण अक्सर नक्शे पर कर दिया जाता है, लेकिन जमीन पर नहीं. भूकंप से कोई नहीं मरता. लोग मरते हैं, तो इमारतों के नीचे दबकर, या फिर भूकंप के कारण हुये भूस्खलन के मलबे में दबकर. हम अपनी इमारतों और उनकी छतों को भूकंप- रोधी बनाकर काफी हद तक इसकी महासंकट से बच सकते हैं. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है.
आफगानिस्तान आये भूकंप के झटके को लेकर चिंतित शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर. आनेवाले कई दिनों तक ऐसे झटके आते रहेंगे. मगर, 300 किमी से अधिक दूरी वाले क्षेत्र होने के कारण आनेवाले भूकंप का प्रभाव जिले पर नहीं पड़ेगा. जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकार की रिपोर्ट जिले में भूकंप से उत्पन्न होने वाली भयावह स्थिति का खुलासा करती है. भूकंप क्षेत्र के लिहाज से जिला सिसमिक जोन चार में आता हैं. ऐसे में अगर कुछ मिनट तक भूकंप के तेज झटके आ जाये तो 57 फीसदी मकान बरबाद हो जाएंगे. औसतन एक मकान में पांच से आठ लोग रहते हैं. जोरदार भूकंप आने पर लगभग 13 लाख जिलेवासी बेघर हो सकते हैं.
