नौ लाख की स्याही खर्च

समस्तीपुर : शहर के गुदरी बाजार की रहने वाली चमेली इस बात को लेकर परेशान है कि उसने पहली बार वोट डाला और वोटिंग खत्म होने के दो दिनों बाद भी उसकी अंगुली की स्याही की रंग नहीं छूट रही है. ऐसे में वह बार-बार मतदान केंद्र के अंदर बैठे उस आदमी को कोस रही […]

समस्तीपुर : शहर के गुदरी बाजार की रहने वाली चमेली इस बात को लेकर परेशान है कि उसने पहली बार वोट डाला और वोटिंग खत्म होने के दो दिनों बाद भी उसकी अंगुली की स्याही की रंग नहीं छूट रही है. ऐसे में वह बार-बार मतदान केंद्र के अंदर बैठे उस आदमी को कोस रही है, जिसने उसकी अंगुली में ऐसी स्याही लगाई जो छूटे नहीं,

छूट रही है. नेल पालिश भी उसे मिटा नहीं पा रहा है. दरअसल उसे यह नहीं मालूम कि इस अमिट स्याही को छूटने में काफी वक्त लगता है. इस चुनाव में अकेले समस्तीपुर जिले के 10 विधानसभा क्षेत्र में 9,13,536 की स्याही खर्च हुई है.

प्रत्येक केंद्र को मिली दो शीशी स्याही

उप निर्वाचन पदाधिकारी मो. सोहैल के अनुसार 10 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 2496 मतदान केंद्र बनाये गये थे. चुनाव में उपयोग के लिए प्रति मतदान केंद्र 10 मि.ली. की दो-दो शीशी अमिट स्याही मतदान कर्मियों को दिया गया जो आयोग द्वारा उपलब्ध कराई गई थी. इस तरह इन 10 विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में 4992 शीशी स्याही का उपयोग हुआ.

एक शीशी स्याही की कीमत 183 रुपये है. साथ ही एक शीशी स्याही से 700 लोगों की अंगुलियों पर निशान लगाए जा सकते हैं. वोट के दौरान उपयोग होने वाली अमिट स्याही से जुड़ी कई बातें मतदान कर्मी भी नहीं जानते हैं.

इस स्याही का उत्पादन मैसूर में सरकारी क्षेत्र की कम्पनी मैसूर पेंट्स एंड वारिनश कंपनी द्वारा किया जाता है. देश में इस तरह की स्याही बनाने वाली यह एक मात्र कम्पनी है जो चुनाव आयोग के आर्डर पर यह अमिट स्याही तैयार करती है. स्याही में मुख्य रसायन सिल्वर नाइट्रेट है.

बैंगनी रंग का यह रसायन प्रकाश में आते ही अपना रंग बदल देता है. इसे किसी भी तरह मिटाया नहीं जा सकता है. देश में पहली बार 1962 के आम चुनाव में न मिटने वाली स्याही का इस्तेमाल हुआ था. तबसे इसका उपयोग हर चुनाव में होने लगा है. साथ ही स्याही लगी अंगुलियां मतदाताओं की जागरूकता तथा मजबूत लोकतंत्र का संदेश देता है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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