चापाकलों की गुणवत्ता की होगी जांच

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने की स्वच्छता सर्वेक्षण की शुरुआत समस्तीपुर : सूखे हलकों पर एक तो पेयजल की किल्लत होती है. वहीं जिन चापाकलों में पेयजल उपलब्ध होता है वहां इनकी गुणवत्ता को लेकर हमेशा उधेड़बुन की स्थिति बनी रहती है. कहीं चापाकलों में गंदगी तो कइयों में प्रदूषित जल की समस्या रहती है. […]

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने की स्वच्छता सर्वेक्षण की शुरुआत
समस्तीपुर : सूखे हलकों पर एक तो पेयजल की किल्लत होती है. वहीं जिन चापाकलों में पेयजल उपलब्ध होता है वहां इनकी गुणवत्ता को लेकर हमेशा उधेड़बुन की स्थिति बनी रहती है. कहीं चापाकलों में गंदगी तो कइयों में प्रदूषित जल की समस्या रहती है.
ऐसे सभी चापाकलों की गुणवत्ता तराशी जायेगी. इसके लिये लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग जिले में स्वच्छता सर्वेक्षण की शुरुआत की है. इससे ऐसे चापाकलों में पायी जाने वाली जैविक अशुद्धता से विभाग रूबरू हो सकेगा व समय रहते इनका निदान कियाजा सकेगा.
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग वर्ष में चापाकलों का दो बार सर्वेक्षण करेगा. मॉनसून पहले व मॉनसून बाद यह सर्वेक्षण कराया जायेगा. प्री मॉनसून के लिये विभाग ने सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ कर दिया है. सर्वेक्षण के लिये विभागीय अधिकारियों की टीम इसकी देख रेख करेगी.
इसके लिये टेस्ट किट के साथ विभाग के क नीय अभियंता व मिस्त्री चापाकलों पर जायेंगे. जहां से जांच के नमूने एकत्र करेंगे. इसके बाद इन नमूनों की जांच जिला जांच प्रयोगशाला के द्वारा की जायेगी. विभाग के अधिकारी ऐसे चापाकलों को विशेष नंबर जारी करेंगे.
यह नंबर चापाकलों पर अंकित की जायेगी. सभी 20 प्रखंडों में गाड़े गये सभी सरकारी चापाकलों को जांच से गुजरना होगा. तभी इनकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी. जिला जांच प्रयोगशाला के रसायनज्ञ संदीप भारती ने बताया कि इस अभियान के तहत चापाकल की जैविक अशुद्धता की जांच की जायेगी. साथ ही चापाकलों के आसपास पायी जाने वाली तत्वों को भी इसमें शामिल किया जायेगा. इसके लिये सभी प्रमंडलों को निर्धारित प्रपत्र उपलब्ध करा दिया गया है.
इसमें स्थल विवरणी, ग्राम पंचायत, पेयजल स्नेत के निकट रहने वाले परिवार की मुखिया का नाम अंकित रहेगा. सभी नमूनों को एच2एस वायल में एकत्र किया जायेगा. जहां से इस नमूने को जांच प्रयोगशाला लाया जायेगा. जांच में दस बिंदुओं को शामिल किया गया है. इसमें छह से अधिक संख्या होने पर ऐसे चापाकलों की जैविक अशुद्धता दूर करने के लिये विभाग की ओर से कार्रवाई की जायेगी.
2007 में की गयी थी जांच
पीएचइडी की ओर से इससे पहले 2007 में चापाकलों की गुणवत्ता की जांच की गयी थी. जिसके बाद ऐसे प्रभावित चापाकलों को लाल निशान से अंकित किया गया था. आम लोगों को इन चापाकल के स्नेतों से पीने की पानी लेने पर पाबंदी लगा दी गयी थी. हालांकि ऐसे स्नेतों से कपड़े धोने आदि रोजाना व्यवहारों के लिये पानी लेने पर पाबंदी नहीं लगायी जाती है.
बोले अधिकारी
मॉनसून के पहले व बाद दोनों समय चापाकलों की जांच की जा रही है. जांच की स्थिति से पानी की गुणवत्ता का आकलन होगा. उसके बाद इसकी स्वच्छता के लिये उपाय शुरू किये जायेंगे.
केएल बैठा, कार्यपालक अभियंता, पीएचइडी

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