/रफोटो संख्या :पूसा. बोरोलॉग इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल साउथ एशिया (बीसा) संस्थान में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आये किसान गेहंू की क्रॉप कटिंग सहित अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों का अवलोकन तथा प्रत्यक्षण किया. इसमें खासतौर पर जीरो टीलेज से बुआई की गयी गेहूं के उत्पादन पर उपस्थित किसानों ने प्रसन्नता जाहिर की. वहीं संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक डॉ राज कुमार जाट ने कहा कि जीरो टीलेज गेहूं के साथ साथ अन्य फसलों के लिए भी वरदान है. इस तकनीक से लगायी गयी फसलों में कम लागत में अधिक पैदावार होने की पूर्ण गारंटी रहती है. आगत किसानों में खानपुर, वारिसनगर, पूसा के किसान शामिल थे. इन्हें आत्मा के सौजन्य से वीसा संस्थान में आधुनिक तकनीक से अवगत कराने को भेजा गया. जीरो टीलेज से बुआई की गयी गेहूं की फसल में 60 से 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन संभव हो सका है. इस व्यवस्था से खेती करने पर जोत, पानी, बीज, उर्वरक आदि खर्च में काफी कमी आती है. डॉ जाट ने बताया कि इस संस्थान में गेहूं की बुआई 1 नवंबर से 15 नवंबर के बीच निश्चित रूप से करा दिया जाता है. उपस्थित किसानों में वारिसनगर से आये खुर्शीद आलम, श्याम सुंदर महतो ने खेतों को लेबलिंग की जरुरत को महसूस किया. वहीं पूसा के विशनपुर बथुआ के चंद्रदेव प्रसाद सिंह ने छोटे प्रकार के आधुनिक कृषि यंत्रों को अधिक महत्वपूर्ण बताया.
कम लागत में अधिक पैदावार : डॉ जाट
/रफोटो संख्या :पूसा. बोरोलॉग इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल साउथ एशिया (बीसा) संस्थान में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आये किसान गेहंू की क्रॉप कटिंग सहित अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों का अवलोकन तथा प्रत्यक्षण किया. इसमें खासतौर पर जीरो टीलेज से बुआई की गयी गेहूं के उत्पादन पर उपस्थित किसानों ने प्रसन्नता जाहिर की. वहीं संस्थान के […]
