दो दशकों से ग्राम कचहरी के भवन में हो रहा संचालनउजियारपुर. लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का जिम्मा उठाने वाले प्रखंड के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नाजिरपुर के भवन को स्वयं इलाज की दरकार है. भवन की हालत ऐसी की कब गिर जाये पता नहीं . ग्रामीण देव नारायण झा बताते है कि करीब दो दशक पूर्व ग्रामीणों के बेहतर इलाज के लिए खोला गया था. लेकिन आज तक इस स्वास्थ्य केंद्र को अपना भवन नहीं मिल सका. वर्षों से इस केंद्र को ग्राम कचहरी के भवन में संचालित किया जा रहा है. छह बेड वाले इस अस्पताल के पीछे पोखरा है जिसके भिंडा पर दीवार बना है. मरीज तो मरीज, डॉक्टर भी इस भवन में बैठने से डरते हैं. न जाने कब और किसी समय यह भवन ध्वस्त हो जाये. अस्पताल बनने के बाद जनप्रतिनिधियों ने इसके प्रति रुचि नहीं दिखाई जिससे दिनानुदिन भवन की स्थिति खराब होती गयी. पीएचसी प्रभारी डॉ आरके सिंह भी भवन की जर्जरता की बात स्वीकार करते हुए कहते हैं कि नाजिरपुर ही नहीं चैता में भी स्वास्थ्य केंद्र को अपना भवन नहीं है. इस संबंध में मुखिया विजय कुमार झा ने बताया कि भवन क ो लेकर पंचायत समिति के बैठक में प्रस्ताव दिया था. लेकिन, इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है.
एपीएचसी भवन को इलाज की दरकार
दो दशकों से ग्राम कचहरी के भवन में हो रहा संचालनउजियारपुर. लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का जिम्मा उठाने वाले प्रखंड के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नाजिरपुर के भवन को स्वयं इलाज की दरकार है. भवन की हालत ऐसी की कब गिर जाये पता नहीं . ग्रामीण देव नारायण झा बताते है कि करीब […]
