सर्जन के जिम्मे पैथोलॉजी

जांच केंद्र : डोयन के बंद होने पर घटने लगी थी मरीजों की रुचि समस्तीपुर : सदर अस्पताल का पैथोलॉजी जांच केंद्र की कमान सर्जन संभाल रहे हैं. हालांकि यह सुकून देने लायक खबर है कि अब तक इस केंद्र से जारी की गयी रिपोर्ट पर कोई आपत्ति सामने नहीं आयी है. इसके लिए केंद्र […]

जांच केंद्र : डोयन के बंद होने पर घटने लगी थी मरीजों की रुचि
समस्तीपुर : सदर अस्पताल का पैथोलॉजी जांच केंद्र की कमान सर्जन संभाल रहे हैं. हालांकि यह सुकून देने लायक खबर है कि अब तक इस केंद्र से जारी की गयी रिपोर्ट पर कोई आपत्ति सामने नहीं आयी है. इसके लिए केंद्र के तकनीशियन की पैनी निगाह को काबिले तारीफ कहा जा सकता है.
क्योंकि डोयन जांच केंद्र के बंद होने के बाद अस्पताल पैथोलॉजी जांच विहीन हो गयी थी. इसके कारण चिकित्सकों को अधिकतर मामलों में क्लीनिकल टेस्ट पर ही आधारित रहना पड़ता था. आपात स्थिति में जांच के लिए मरीजों को बाहर का रास्ता देखना पड़ रहा था. अस्पताल की इस व्यवस्था के कारण धीरे-धीरे ओपीडी से मरीजों की रुचि घटने लगी थी. जिसे गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन सिविल सर्जन डा. शंकर झा ने विभागीय महकमे के आला अधिकारियों के निर्देश पर सदर अस्पताल के पैथोलॉजी जांच केंद्र को फिर से जीवंत करने का बीड़ा उठाया.
वर्षो तक ठप जांच केंद्र के उपकरणों को फिर से सक्रिय किया गया. आवश्यक रासायनिक तत्वों को उपलब्ध कराते हुए जांच केंद्र को फिर से सक्रिय किया गया. जिसके बाद स्थिति बदल सी गयी है. अब स्थिति यह है कि डोयन जिस जांच को निर्धारित शुल्क को लेकर मरीजों को उपलब्ध कराता था, फिलहाल करीब वे सभी जांच मुफ्त में मरीजों का किया जा रहा है. वर्तमान समय में औसतन 20 से 30 मरीज इस केंद्र तक दस्तक देने पहुंच रहे हैं. जिनके जांच 50 से 60 तरह के हो रहे हैं.
अधिकतर मामलों में उन्हें हाथो हाथ रिपोर्ट उपलब्ध कराया जा रहा है. लेकिन यह सब पैथोलॉजिस्ट की जगह सर्जन की अगुवायी में हो रहा है, जो अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है. जानकार बताते हैं कि जांच जैसे महत्वपूर्ण केंद्र पर पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर की नियुक्ति होनी चाहिए. जिनकी निगाह से गुजर कर ही मरीजों को जांच रिपोर्ट मिलनी चाहिए. इस सब से भिज्ञ सेहत महकमा ऐसे महत्वपूर्ण केंद्र को लेकर चौकस नजर नहीं आ रहा है. यह मरीज हित में ठीक नहीं है. अस्पताल उपाधीक्षक डा. श्याम मोहन दास ने बताया कि केंद्र में चिकित्सक की नियुक्ति विभागीय स्तर से पदाधिकारियों द्वारा की गयी है.
सदर अस्पताल के पैथोलॉजी केंद्र में मरीजों की बढ़ रही संख्या ने कर्मचारियों की किल्लत को झलकाना शुरू कर दिया है. सूत्र बताते हैं कि इस केंद्र में मात्र दो तकनीशियन हैं. जिनके सहयोग से औसतन हर रोज पहुंचने वाले 30 मरीजों के चार से पांच तरह की जांच की जा रही है. समय पर रिपोर्ट देने के लिए इन्हें दिन भर पसीना बहाना पड़ता है. जिससे एक तकनीशियन की और नियुक्ति आवश्यक प्रतीत हो रही है.
ग्लोबल स्टैंडर हो लैब
फिलहाल पैथोलॉजी जांच केंद्र साधारण तरह से काम कर रहा है. जिसे और चुस्त दुरुस्त करने की आवश्यकता है. फिलहाल जांच रिपोर्ट मरीजों को अस्पताल की ओर से मरीजों को मिलने वाले निबंधन परची पर ही कलम से लिख दिया जाता है. इसकी रिपोर्ट बही खाते में होती है. ताकि मरीजों को मिलने वाली प्रति के साथ इसकी रिपोर्ट मशीन में दर्ज हो.

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