आस्था ने दिया पुस्तैनी धंधे को पंख

फोटो संख्या : 6 लाजवाब हूनर के बावजूद थोड़े में करते गुजाराप्रतिनिधि, विद्यापतिनगर कमर तोड़ महंगाई ने पुरुखों के धंधा को अलविदा कह दिया. कतिपय मूर्तिकारों की आस्था ने पुस्तैनी धंधे को पंख दिया है़ ये आज भी पत्थरों को तरास कर मिट्टियों को गोंद, मूर्ति निर्माण कर उसमें जान डाल रहे हैं़ बेमिसाल कलाकारी […]

फोटो संख्या : 6 लाजवाब हूनर के बावजूद थोड़े में करते गुजाराप्रतिनिधि, विद्यापतिनगर कमर तोड़ महंगाई ने पुरुखों के धंधा को अलविदा कह दिया. कतिपय मूर्तिकारों की आस्था ने पुस्तैनी धंधे को पंख दिया है़ ये आज भी पत्थरों को तरास कर मिट्टियों को गोंद, मूर्ति निर्माण कर उसमें जान डाल रहे हैं़ बेमिसाल कलाकारी इनके गरीबी में कभी बाधक नहीं बना़ यह आस्था की देन है़ हाथों की लकीरों को खुद के हुनर से बदलने की जिज्ञासा मूर्तिकारों में आस्था के कारण आज भी दबी रह जाती है़ चाहे तो महानगर में कुली का काम करके भी ये अपने पुस्तैनी धंधे से ज्यादा कमा सकते हैं़ पर आस्था और पुरुखों के प्रति मर्यादा आज इनसे सुशोभित हो रहा है़ मूर्तिकार उजियारपुर के गांवपुर निवासी स्व. रामचरण पंडित के पुत्र हरिश्चंद्र पंडित अपने परिवार का भरण पोषण मूर्ति निर्माण कर करते हैं़ वीणा वादिनी के पूजनोत्सव के लिये दर्जनों मूर्ति का निर्माण कर रहे पंडित ने बताया कि हुनर तो इससे ज्यादा कमाने का है़ रेलवे प्लेटफॉर्म पर कुली का काम कर इससे ज्यादा कमाया जा सकता है़ परंतु पुरुखों ने विरासत में हमें यह हुनर दिया है़ जिसे हम संभाल कर रखना चाहते हैं़ ताकि यह हुनर जीवित रहे़ कहा कि इससे आस्था का भी जुड़ाव है़ ज्यादा की लालच नहीं कर अपनी आस्था और परंपरा को संयोग कर अपने पुरुखों के प्रति आदर भाव बरत रहे हैं.

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