मोहिउद्दीननगर : प्रखंड क्षेत्रों में हुई अच्छी बारिश ने किसानों के मुरझाये चेहरों पर मुस्कुराहट ला दी. अमूमन किसानों ने अपने ही बदौलत खेतों में सिंचाई की व्यवस्था की थी.
रबी फसलों में दूसरे सिंचाई की आवश्यकता किसानों द्वारा महसूस की जा रही थी. एक लोकोक्ति अगहन बरसे सोना, पूस बरसे दूगना, माघ बरसे सवाई और फाल्गून बरसे घर से गबाई के अनुसार पूस माह में हुई बारिश से किसानों की बांछे खिल गये. तत्पश्चात खेतों में यूरिया की प्रयोग की बात सोचने लगे.
जब किसान इस सिलसिले में खाद्य विक्रेताओं के पास पहुंचे तो विक्रेता यूरिया का आवक नहीं होने की बात गयी. इंद्र देवता की हुई मेहरबानी से जो चेहरे खिले खिले थे, अचानक इन चेहरों पर मायूसी छाने लगी. किसान अजय कुमार सिंह कहते हैं जब फसल पौधों में फूल एवं फलन की प्रक्रिया शुरू हुई है तो ऐसे समय में यूरिया का कृत्रिम अभाव उत्पन्न किया जा रहा है. किसान अशर्फी पासवान इस संदर्भ में कहते हैं कि सरेआम यूरिया प्रति बैग 400 रुपये की दर से दुकानदारों के द्वारा बेची जा रही है.
किसान सुरेश प्रसाद राय कहते हैं कि जब हम दुकानदार के पास यूरिया लेने जाते है तो यूरिया ना होने की बात कही जाती है. लोजपा के वरीय नेता संजीव कुमार सिंह इस संदर्भ में कहते हैं कुछ व्यवसायी सोची-समझी रणनीति के तहत यूरिया को बाजार से गायब कर कृत्रिम अभाव उत्पन्न कर किसानों से ऊं ची कीमत वसूल रहे हैं. इस बावत संपर्क करने पर बीएओ नवलकिशोर सिंह ने जानकारी दी कि अगले 48 घंटे प्रखंड क्षेत्र के अनुज्ञप्ति प्राप्त खाद्य विक्रेताओं को यूरिया की उपलब्धता करा दी जायेगी. साथ साथ तीन पैक्स अध्यक्षों के द्वारा यूरिया का उठाव भी इस सिलसिले में किया जा रहा है. शीघ्र समस्या का निदान हो जायेगा.
