काव्य संध्या में कवियों के चले व्यंग-वाणकुसुम पांडेय स्मृति साहित्य ने किया आयोजनप्रतिनिधि, समस्तीपुर राष्ट्र ध्वज अपना तिरंगा गगन में लहरा रहा…, लग गयी है आग हर पड़ाव में… जैसे शब्द वाण घंटों चलते रहे. श्रोता साहित्य सागर में गोते लगाते रहे. अवसर था काव्य संध्या का. आयोजक था कुसुम पांडेय स्मृति साहित्य संस्थान. शहर के मगरदही स्थित कुसुम सदन में रविवार की देर संध्या कवियों के बोल देर रात फूटते रहे. अध्यक्षता गीतकार द्वारिका राम सुबोध ने की. संचालन प्रवीण कुमार चुन्नू ने किया. रचनाकारों का स्वागत डॉ धर्मेंद्र आशुतोष ने किया. मुख्य अतिथि डॉ नरेश कुमार विकल के छठ गीत से शुरू हुई काव्य संध्या में संस्था के अध्यक्ष शिवेंद्र कुमार पांडेय ने नवंबर महीने में उत्पन्न हुए साहित्यकार पद्मश्री रामावतार अरुण, डॉ हरिवंश राय बच्चन, मो. अल्लामा इकबाल के जीवनवृत पर विस्तार से प्रकाश डाला. इसके बाद कवि विष्णु कुमार केडिया, रघुवंश प्रसाद वर्मा, रवींद्र ठाकुर, शिवेंद्र कुमार पांडेय, उदय शंकर ठाकुर, परमानंद पांडेय, उज्जवल कुमार सिन्हा, राजेश वर्मा, प्रवीण कुमार चुन्नू, नंद किशोर शर्मा, ई. अजीत कुमार सिंह, जग मोहन चौधरी, प्रियरंजन सूर्यवंशी, गणेश प्रसाद सारंग, आचार्य परमानंद प्रभाकर, धनेश्वर शर्मा, फखरुद्दीन अली जौहर, पंकज कुमार देव, रामाश्रय राय राकेश, राज कुमार राय राकेश, शंकर अज्ञानी, डॉ देव नारायण अंशुमाली, सुमन माला सिन्हा, शैलजा कनिष्ठा, आशीष कुमार झा, अनिल कुमार सिंह, डॉ चितरंजन प्रसाद सिंह, वेद प्रकाश साह, रुपा देवी, नवल किशोर, अनंत अमन आदि ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति पर जमकर तालियां बटोरी.
राष्ट्र ध्वज अपना तिरंगा गगन में लहरा रहा...
काव्य संध्या में कवियों के चले व्यंग-वाणकुसुम पांडेय स्मृति साहित्य ने किया आयोजनप्रतिनिधि, समस्तीपुर राष्ट्र ध्वज अपना तिरंगा गगन में लहरा रहा…, लग गयी है आग हर पड़ाव में… जैसे शब्द वाण घंटों चलते रहे. श्रोता साहित्य सागर में गोते लगाते रहे. अवसर था काव्य संध्या का. आयोजक था कुसुम पांडेय स्मृति साहित्य संस्थान. शहर […]
