Sand Ghat Auction: समस्तीपुर जिले में बालू की बढ़ती किल्लत को दूर करने और सरकारी राजस्व को गति देने के लिए खनन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है. जिले में चिह्नित कुल 15 उजले बालू घाटों (क्लस्टरों) में से वर्तमान में केवल 2 घाट ही संचालित हो रहे हैं, जबकि 13 घाट लंबे समय से अनिलामित पड़े हैं. इसका सीधा असर स्थानीय निर्माण कार्यों, आम जनता की जेब और सरकारी खजाने पर पड़ रहा है. इस गंभीर स्थिति को देखते हुए खनन विभाग के निदेशक ने सभी अनिलामित घाटों की समीक्षा कर उन्हें अविलंब नीलाम करने के निर्देश जारी किए हैं.
डीएमओ से मांगी गई रिपोर्ट, तकनीकी व कानूनी अड़चनों की होगी जांच
खनन निदेशक ने जिला खनिज विकास पदाधिकारी (डीएमओ) को निर्देश दिया है कि जिले के सभी बालू घाटों की अद्यतन सूची मुख्यालय भेजें. रिपोर्ट में उन सभी तकनीकी, कानूनी और प्रशासनिक कारणों का ब्योरा तलब किया गया है, जिसके कारण 13 घाटों का संचालन शुरू नहीं हो सका.
लक्ष्य से पिछड़ा राजस्व संग्रह
13 घाटों के बंद रहने से वित्तीय वर्ष 2026-27 के जून तक विभाग निर्धारित लक्ष्य का केवल आधा राजस्व ही जुटा सका है.
- वार्षिक राजस्व लक्ष्य: ₹7,173.52 लाख
- जून तक वसूली लक्ष्य: ₹717.35 लाख
- जून तक वास्तविक वसूली: ₹359.07 लाख
- कुल उपलब्धि: मात्र 50.05%
13 घाट चालू होने से आम जनता को मिलेगी राहत
केवल 2 घाटों से खनन होने के कारण बाजार में बालू की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे निजी मकान निर्माण और सरकारी ढांचागत योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हैं. आपूर्ति की कमी से अवैध खनन और कालाबाजारी का खतरा भी बना हुआ है. विभाग का मानना है कि शेष 13 घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूरी होते ही:
- बाजार में उचित एवं नियंत्रित दरों पर बालू की उपलब्धता सुनिश्चित होगी.
- अवैध खनन तथा अवैध परिवहन पर प्रभावी रोक लगेगी.
- स्थानीय स्तर पर मजदूरों और ट्रांसपोर्टरों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.
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