समस्तीपुर : समस्तीपुर रेल मंडल ने समस्तीपुर सहरसा रेलखंड पर पड़ने वाले रोसड़ा व दौरम मधेपुरा प्लेटफॉर्म के ऊंचीकरण की योजना तैयार कर ली है. दोनों स्टेशन के उन्नयनीकरण पर करीब 10 करोड़ की लागत आयेगी. इसमें रोसड़ा स्टेशन के उन्नयन में रेलवे को करीब 5.7 करोड़ की राशि खर्च आयेगी, तो दूसरी ओर दौरम मधेपुरा स्टेशन के उन्नन का कार्य भी किया जायेगा. इस पर करीब 4.86 करोड़ की राशि खर्च होगी. दोनों स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या एक व दो दोनों की ऊंचाई बढ़ायी जायेगी. इस बाबत जानकारी देते हुए समस्तीपुर मंडल के सीनियर डिवीजनल इंजीनियर कॉर्डिनेशन बीके सिंह ने बताया कि इसका प्रस्ताव तैयार कर रेलवे को भेज दिया गया है.
निर्माण पर खर्च होंगे "10 करोड़
समस्तीपुर : समस्तीपुर रेल मंडल ने समस्तीपुर सहरसा रेलखंड पर पड़ने वाले रोसड़ा व दौरम मधेपुरा प्लेटफॉर्म के ऊंचीकरण की योजना तैयार कर ली है. दोनों स्टेशन के उन्नयनीकरण पर करीब 10 करोड़ की लागत आयेगी. इसमें रोसड़ा स्टेशन के उन्नयन में रेलवे को करीब 5.7 करोड़ की राशि खर्च आयेगी, तो दूसरी ओर दौरम […]

प्लेटफॉर्म नीचे रहने से आ रही थी समस्या. रोसड़ा व दौरम मधेपुरा स्टेशन के प्लेटफॉर्म की सतह नीचे रहने के
कारण दोनों स्टेशन पर यात्रियों को आवाजाही में काफी परेशानी हो रही थी. खासकर दौरम मधेपुरा स्टेशन पर तो इसके कारण ट्रेन पकड़ना यात्रियों के लिए समस्या बन गयी थी. छोटे बच्चे, महिलाओं, दिव्यांगों को ट्रेन की सफर करने के लिये गेट पकड़कर चढ़ना पड़ता था. विगत तीन सालों से इसके लिये प्लेटफॉर्म ऊंचीकरण करने की मांग लोग रेलवे से कर रहे थे.
जलतंत्र को विकसित करने की तैयारी
रेलवे अपने पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने की तैयारी में जुट गया है. रक्सौल स्टेशन हो या समस्तीपुर के गंडक कॉलोनी की व्यवस्था रेलवे ने यहां जलतंत्र विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है. सबसे पहले चरण में रक्सौल जंक्शन स्थित विश्रामालय की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त किया जायेगा. वहीं गंडक कॉलोनी में लोगों की समस्याओं को देखते हुए जलतंत्र को विकसित किया जायेगा. प्रारंभिक चरण में रेलवे ने लगभग 70 लाख की लागत से इसके लिए योजना तैयार की है. इस बाबत श्री सिंह ने बताया कि इसके लिए विगत दिनों बैठक आयोजित की गयी थी, जिसमें इसकी रूपरेखा पर विस्तार रूप से चर्चा की गयी. रेलवे का मुख्य उद्देश्य ऐसे तंत्र को विकसित करना है, जिससे वर्तमान तंत्र में कहीं समस्या आ जाये, तो भी निर्बाध रूप से लोगों को पेयजल की आपूर्ति हो सके.