पूसा : डाॅ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय विवि के कुलपति डाॅ आरसी श्रीवास्तव ने कहा कि पीपराकोठी में उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय खुलेगा. इसकी स्वीकृति डीआरआइ से मिल गयी है. राज्य सरकार से सैद्धांतिक रूप से दो कृषि व एक पशु महाविद्यालय खोलने पर सहमति मिल गयी है. वे डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि के विद्यापति सभागार में अनुसंधान परिषद की तीन दिवसीय खरीफ को लेकर आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे. इससे पहले उन्होंने सेमिनार का उद्घाटन किया. मौके पर उन्होंने विवि में कचरा प्रबंधन, मशरूम, सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई प्रणाली, जैविक खेती पर हो रहे कार्यों की समीक्षा की.
पीपराकोठी में खुलेगा उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय : वीसी
पूसा : डाॅ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय विवि के कुलपति डाॅ आरसी श्रीवास्तव ने कहा कि पीपराकोठी में उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय खुलेगा. इसकी स्वीकृति डीआरआइ से मिल गयी है. राज्य सरकार से सैद्धांतिक रूप से दो कृषि व एक पशु महाविद्यालय खोलने पर सहमति मिल गयी है. वे डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि के […]

उन्होंने बताया कि राज्य भवन में विवि के माध्यम से सोलर ट्री लगाया गया है तथा कचरा प्रबंधन के कार्यों को राज्य भवन में स्थापित करने को लेकर भी स्वीकृति मिल गयी है. राज्य सरकार द्वारा, मशरूम क्षेत्र में हो रहे विकास की सराहना की गयी है. वहीं सरकार से मशरूम अनुसंधान की परियोजना को चालू करने पर विचार किया जा रहा है.
भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ केपी त्रिपाठी ने वैज्ञानिकों को मौसम के बदलते परिवेश के अनुरूप अनुसंधान की दिशा तय करने की सलाह दी. केंद्रीय आलू संस्थान केंद्र, शिमला के पूर्व निदेशक ने बदलते मौसम, परिवेश व पानी के स्तर को लेकर प्रत्येक विभाग में 4-5 योजनाओं को चालू करने की सलाह दी.
स्वागत विवि के निदेशक अनुसंधान डॉ मिथिलेश कुमार ने किया. उन्होंने विवि में पिछले व आगामी सत्र में चल रही योजनाओं पर चर्चा की. मंच का संचालन डॉ एमपी सिंह ने किया. इस दौरान डॉ डीके राय द्वारा रचित पुस्तक प्रैक्टिकल मैनुअल ऑन विड मैनेजमेंट तथा राजीव कुमार द्वारा रचित पुस्तक मैनुअल ऑफ व्हीट मौल्लिकुलर ब्रीडिंग का विमोचन भी किया गया.
मौके पर विवि के कुलसचिव डॉ रवि नंदन, डॉ एसके वर्साने, डॉ एससी राय, डॉ मीरा सिंह, डॉ राम सुरेश, डॉ एमके सिंह, निदेशक बीज डॉ पीपी सिंह, निदेशक योजना डॉ आरती सिन्हा, डॉ एसके जैन, डॉ एनके सिंह, डॉ देवेंद्र सिंह, डॉ एके मिश्रा, डॉ विनोद कुमार, डॉ दिव्यांशु शेखर, डॉ शंकर झा, डॉ मुकेश श्रीवास्तव, डॉ मृत्युंजय कुमार, डॉ विपिन कुमार, डॉ संजय तिवारी, डॉ महेश कुमार, डॉ दिनेश रजक आदि वैज्ञानिक मौजूद थे.