खानपुर : अवध असम एक्सप्रेस में पेंट्रीकार कर्मी के रूप में कार्यरत प्रमोद कुमार राय का शव सोमवार को उसके घर पहुंचते ही टेढ़ा गांव में कोहराम मचा गया. परिजनों पर आफत का पहाड़ टूट पड़ा है. इसको भांपते हुए सांत्वना देने पहुंचे जनप्रतिनिधियों व ग्रामीण सरकार से मृतक के परिजनों को दस लाख रुपये मुआवजा देने की मांग कर रहे थे. ग्रामीणों के बीच जारी चर्चा के मुताबिक 27 वर्षीय प्रमोद के पिता रामपुकार राय ने रोजी-रोटी के लिए उसे प्रेरित कर इस काम में लगाया.
अवध असम ट्रेन के पेंट्रीकार में आरके कैंटिंन में वह कार्यरत था. मालिक के आदेश पर वह गत 23 मार्च को सामान लाने के लिए ट्रेन से कहीं जा रहा था. इसके साथ कृष्णा, आजाद व दो अन्य थे. इसी क्रम में गुवहाटी से डिब्रूगढ़ जाने वाली ट्रेन के बोगी नंबर एस 5 के सीट संख्या 65 पर उसकी हत्या कर दी गयी. कृष्णा व आजाद ने परिजनों को प्रमोद की मौत की जानकारी दी. पूछताछ के दौरान संदेह होने पर परिजन बेटे की लाश लाने के लिए घर से रवाना हुए.
इस बीच सहकर्मियों ने डिब्रूगढ़ स्टेशन पर जीआरपी को घटना की सूचना देकर प्रमोद को अस्पताल ले जाकर उसका पोस्टमार्टम करा दिया. शव को लेकर कैंटिंग मैनेजर मुकेश राय सहकर्मी आजाद व कृष्णा के साथ लेकर आ रहा था. संपर्क करने पर वे लोग धुपगुड़ी बस स्टैंड एनएच 31 के बगल में ठहरने को कहा. जहां परिजनों ने घटना के बाबत जानकारी मांगी, तो मैनेजर मुकेश राय ने बताया कि प्रमोद की हत्या की घटना के बारे में सहकर्मी ने फरकटिंग और मरयानी स्टेशन के बीच होने की जानकारी दी. परिजनों का मानना है कि हत्या कौन किया और क्यों किया इसकी पूरी जांच की जानी चाहिए. परिजनों के मुताबिक घटना से कुछ ही देर पहले प्रमोद ने अपनी मां, बाप, भाई, बहन एवं अन्य से बातचीत की थी. इधर, सांत्वना देने पहुंचे रालोसपा के किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रजनन्दन महतो, जिला पार्षद प्रियंका कुमारी, जिला पार्षद स्वर्णिमा सिंह, बैद्यनाथ कुशवाहा, स्थानीय मुखिया सुभद्रा देवी, उप मुखिया संजय राय, राजेश राय आदि ने सरकार से मुआवजा देने की मांग की.
