सहरसा : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने कहा कि राष्ट्र निर्माण और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं. यदि युवा अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करें और प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता. वह स्थानीय देव रिसॉर्ट में आयोजित 'पर्यावरण संरक्षण एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका' विषयक संगोष्ठी में छात्रों और युवाओं को संबोधित कर रहे थे.
हर वर्ष 10 पौधे लगाने का किया आह्वान
अपने संबोधन में रामदत्त चक्रधर ने कहा कि जीवन के लिए जल और अन्न जितने आवश्यक हैं, उतनी ही शुद्ध हवा भी जरूरी है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे प्रत्येक वर्ष कम से कम 10 पौधे लगाएं और उनकी नियमित देखभाल भी करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण मिल सके.
पंच परिवर्तन का दिया मंत्र
उन्होंने छात्रों और युवाओं के बीच संघ के पंच परिवर्तन का मंत्र भी साझा किया. उन्होंने बताया कि इसमें पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्वदेशी और नागरिक बोध जैसे पांच प्रमुख विषय शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को जीवन में अपनाकर ही एक सशक्त, समरस और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है.
राष्ट्र सर्वोपरि का भाव विकसित करने पर जोर
रामदत्त चक्रधर ने कहा कि प्रत्येक नागरिक के मन में राष्ट्र सर्वोपरि का भाव जागृत होगा, तभी भारत विकास और सांस्कृतिक नेतृत्व के नए आयाम स्थापित करेगा. उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया.
संगोष्ठी में जिला संघ चालक सतीश चंद्र वर्मा, प्रांत सह प्रचारक प्रवीर जी, विभाग प्रचारक सुमित जी, मेजर डॉ. गौतम कुमार, ज्ञानू, आशीष टिंकू, रणधीर भगत, मनीष चौपाल, विजय सिंह, रंजीत दास सहित संघ के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता, छात्र एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे.
