वर्षों से जमीन की आस में भटक रहे भूमिहीन परिवारों का फूटा गुस्सा, बासगीत पर्चा और स्थायी बसावट की मांग

सहरसा के सलखुआ में भूमिहीन परिवारों ने बासगीत पर्चा और स्थायी जमीन की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. प्रशासन से जल्द समाधान की गुहार लगाई गई है.

सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में शुक्रवार को दो दर्जन से अधिक महिलाओं ने बासगीत पर्चा (भूमिहीन आवास पर्चा) और स्थायी बसावट की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. बालू टोला, तिरासी वार्ड संख्या-5 में रेलवे लाइन के किनारे रहने वाले इन भूमिहीन परिवारों की महिलाओं ने अंचल प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जताते हुए शीघ्र सुरक्षित स्थान पर जमीन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई.

अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद रेलवे ट्रैक किनारे रहने को मजबूर

प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया:

  • खेतों से रेलवे ट्रैक तक का सफर: इससे पूर्व प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद ये परिवार कुछ समय तक खेतों में झोपड़ियां बनाकर रहने को मजबूर हुए थे. लेकिन वहां भी स्थायी ठिकाना न मिलने पर मजबूरी में उन्हें फिर से रेलवे ट्रैक के किनारे लौटना पड़ा.
  • रेलवे से मिला नोटिस: अब रेलवे विभाग की ओर से भी उन्हें जगह खाली करने का नोटिस थमा दिया गया है. महिलाओं का दर्द है कि अगर वहां से भी हटा दिया गया, तो वे अपने मासूम बच्चों को लेकर कहां जाएंगी?

आपदाओं और असुरक्षा के बीच कट रही जिंदगी

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि बारिश, बाढ़ और भीषण ठंड जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान उनकी स्थिति और भी दयनीय हो जाती है:

  • बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य प्रभावित: रेलवे ट्रैक के किनारे रहने से हादसों का खतरा हमेशा बना रहता है. इसका सीधा असर बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है.
  • आश्वासन के बाद भी नहीं मिला पर्चा: कई बार अंचल कार्यालय के चक्कर काटने और आवेदन देने के बावजूद अब तक प्रशासन द्वारा उन्हें एक धूर जमीन भी उपलब्ध नहीं कराई गई है.

प्रक्रिया जारी है, उपयुक्त भूमि मिलते ही दिया जाएगा पर्चा: CO

मामले को लेकर अंचलाधिकारी (CO) रवि कुमार ने बताया:

अंचलाधिकारी का बयान: "पात्र भूमिहीन परिवारों को बासगीत पर्चा देने की प्रक्रिया चल रही है. जैसे ही उपयुक्त सरकारी भूमि चिह्नित कर ली जाएगी, तुरंत नियमानुसार पात्र परिवारों को बसाने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी."

स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते भूमिहीनों को स्थायी तौर पर बसाने के लिए ठोस कदम उठाए, तो सैकड़ों परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सकता है.


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By Bashistha Kumar

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