संघर्ष की आग में तपकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने वाले अभियंता, समाजसेवी और सक्रिय राजनीतिक व्यक्तित्व स्व. अवध किशोर यादव का तीन सितंबर 2026 को पटना स्थित आवास पर करीब 72 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उनके निधन की खबर फैलते ही सलखुआ सहित सहरसा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गयी. सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उनके निधन को क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया.
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
पटना से उनका पार्थिव शरीर उनके जन्मस्थल एवं पैतृक गांव मोबारकपुर लाया गया. पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा. हजारों की संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, शुभचिंतक और विभिन्न वर्गों के लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे. माहौल गमगीन था. हर आंख नम थी और हर जुबान पर अवध किशोर यादव के संघर्ष, सरल स्वभाव और समाज के प्रति उनके योगदान की चर्चा थी.
अभावों से निकले, मेहनत से बनाई पहचान
अवध किशोर यादव का जीवन संघर्ष और संकल्प की ऐसी कहानी रहा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी. साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बीच शिक्षा हासिल की. अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर अभियंता के रूप में मुकाम हासिल किया. जीवन के शुरुआती संघर्षों को उन्होंने कभी अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया. कठिनाइयों को चुनौती मानकर आगे बढ़ते रहे और अंततः इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनायी.
नौकरी के दौरान उन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया. सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका जीवन आराम तक सीमित नहीं हुआ. उन्होंने समाज के बीच रहकर लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनना अपना ध्येय बना लिया.
राजनीति में पद नहीं, जनसेवा रही प्राथमिकता
सेवानिवृत्ति के बाद अवध किशोर यादव सक्रिय राजनीति से जुड़े. विधायक बनने की उनकी राजनीतिक आकांक्षा भले पूरी नहीं हो सकी, लेकिन जनसेवा के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ. उन्होंने राजनीति को पद और प्रतिष्ठा के बजाय समाजसेवा का माध्यम माना. क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को लेकर वे हमेशा सक्रिय रहे.
उन्होंने अपनी पत्नी आशा यादव को पंचायत समिति सदस्य के रूप में चुनाव जिताने में अहम भूमिका निभायी. इससे पूर्व अपने पिता को मुखिया पद का चुनाव लड़ाकर उन्हें विजयी बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. वहीं, सलखुआ निवासी अपने ससुर एवं सेवानिवृत्त शिक्षक राजेंद्र प्रसाद यादव को प्रखंड प्रमुख बनाने में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही. उनके प्रयासों का उद्देश्य केवल चुनावी सफलता हासिल करना नहीं था, बल्कि समाज के लोगों को राजनीतिक और सामाजिक रूप से आगे बढ़ाना था.
संघर्ष और समाजसेवा की मिसाल छोड़ गये
मोबारकपुर में अवध किशोर यादव के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ उनके प्रति लोगों के गहरे जुड़ाव की गवाही दे रही थी. बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक हर कोई उनके साथ बिताये पलों को याद कर भावुक नजर आया. लोगों का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन में संघर्ष को करीब से देखा, सफलता हासिल की और फिर उस सफलता को समाज के लिए समर्पित कर दिया.
ग्रामीणों ने कहा कि अवध किशोर यादव भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके संघर्ष की कहानी, समाज के लिए किये गये कार्य और लोगों से उनका आत्मीय रिश्ता लंबे समय तक याद किया जाता रहेगा.
पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कार
स्व. अवध किशोर यादव अपने पीछे एक पुत्र और तीन पुत्रियों समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं. पैतृक गांव मोबारकपुर में उनका अंतिम संस्कार किया गया. अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और शुभचिंतक शामिल हुए और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी.
अंतिम यात्रा में जिप अध्यक्ष प्रतिनिधि सुरेंद्र कुमार यादव, वीआइपी प्रदेश प्रवक्ता मिथिलेश विजय, राजद नेता रंजीत यादव, शिक्षक नेता अजीत कुमार, पूर्व प्रमुख अशोक यादव, इंद्रदेव यादव, मुखिया रणवीर यादव, मुखिया भिन्सी यादव, राजद नेता बिनोद यादव, दिनेश चौधरी, केसरी कुमार, जयकृष्ण कुमार, नवीन कुमार यादव, पूर्व मुखिया ललन यादव, प्रो. रमेश यादव, राजद नेता रणवीर यादव सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे.
